सिंगरौली के जियावन थाने में लंबे समय से थाना प्रभारी का पद रिक्त, चरमराई कानून-व्यवस्था; पैकारी से गांव-गांव बिक रही अवैध शराब, गांजा तस्करी और रेत के अवैध उत्खनन से बढ़ा जनआक्रोश

सिंगरौली/जियावन: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के जियावन थाना क्षेत्र से पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी प्रशासनिक ढिलाई का मामला सामने आया है। लंबे समय से जियावन थाने में नियमित थाना प्रभारी (TI) का पद रिक्त होने के कारण पूरे अंचल की कानून-व्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। वर्तमान में थाने की कमान एक उप निरीक्षक (SI) के भरोसे चल रही है, जिससे प्रशासनिक मुस्तैदी प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि मजबूत पुलिस नेतृत्व न होने से क्षेत्र में अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी और रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

उप निरीक्षक पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ; गांव-गांव फैली शराब की पैकारी

जियावन थाना क्षेत्र की इस लचर सुरक्षा व्यवस्था और अवैध कारोबार की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • शराब और गांजा का सज रहा बाजार: स्थानीय ग्रामीणों ने विलेख आरोप लगाया है कि जियावन क्षेत्र के विभिन्न गांवों और प्रमुख बाजारों में अवैध शराब का सिंडिकेट सक्रिय है। नियमों को ताक पर रखकर गांव-गांव में पैकारी (अवैध बिक्री केंद्र) के माध्यम से शराब की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है। इसके साथ ही, बाहरी राज्यों और पड़ोसी जिलों से गांजे की बड़ी खेप लाकर स्थानीय युवाओं को नशे की गर्त में धकेला जा रहा है, जिससे सामाजिक अपराध बढ़ने की विधिक आशंका पैदा हो गई है।
  • सोन नदी का सीना चीर रहे रेत माफिया: क्षेत्र की जीवनदायिनी सोन नदी और उससे जुड़े नालों में रात के अंधेरे में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से जारी है। बिना किसी विधिक रॉयल्टी के ट्रैक्टरों और डंपरों के माध्यम से शासकीय संपदा की चोरी की जा रही है, जिससे पर्यावरण विंग को भारी क्षति हो रही है और शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।

अवैध संरक्षण के लग रहे आरोप; पुलिस अधीक्षक से नियमित टीआई की पदस्थापना की मांग

थाने के लचर प्रबंधन को लेकर सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है:

  1. सिर्फ कागजी कार्रवाई का विलेख: ग्रामीणों का कहना है कि अवैध गतिविधियों की सूचना कई बार स्थानीय पुलिस बीट और डायल 100 को दी गई, लेकिन प्रभावी विधिक कार्रवाई न होने से माफिया बेखौफ हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने तो पुलिस की निचली विंग द्वारा इन विधिक अपराधियों को मूक संरक्षण देने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।
  2. अतिरिक्त प्रभार से प्रभावित हो रही निगरानी: उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी पर विवेचना, वीआईपी ड्यूटी और कोर्ट विलेखों के साथ-साथ पूरे थाने के प्रशासनिक संचालन का दोहरा दबाव है। विशाल भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण रात की गश्त और त्वरित पुलिस रेस्पॉन्स की कड़ियाँ कमजोर साबित हो रही हैं।

एसपी विंग से विशेष जांच दल और धरपकड़ अभियान की दरकार

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —

“जियावन के सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने सिंगरौली पुलिस अधीक्षक (SP) को एक विधिक मांग पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से अनुभवी और नियमित थाना प्रभारी की पदस्थापना करने का आग्रह किया है.

ग्रामीणों का कहना है कि आगामी त्योहारों और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक मजबूत पुलिस कप्तान की मौजूदगी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही आबकारी और खनिज विभाग की संयुक्त विंग के साथ मिलकर जियावन में माफियाओं के खिलाफ एक विशेष धरपकड़ अभियान चलाने की विधिक आवश्यकता है ताकि आम जनता का खाकी पर विश्वास दोबारा बहाल हो सके।”

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