मझगवां/सतना: विंध्य अंचल के सतना जिले अंतर्गत आने वाले मझगवां वन परिक्षेत्र से वन्यजीव अपराध की एक बेहद खौफनाक और हैरान कर देने वाली वारदात सामने आई है। बिछियन और कररिया बीट के घने जंगलों में शिकारियों के जाल में फंसकर एक बाघ की दर्दनाक मौत हो गई। वन विभाग के कड़े विधिक शिकंजे और जांच में यह परत खुली है कि बाघ की मौत हाई-वोल्टेज करंट के जाल में फंसने से हुई थी, जिसके बाद पकड़े जाने के डर से शातिर आरोपियों ने उसके शव को जंगल में ही दफन कर दिया था। इस पूरे विधिक मामले में वन विभाग ने अब तक 8 आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया है।

रक्षक ही निकला भक्षक! वन चौकीदार का भाई प्रेम सिंह गोड़ है मुख्य शिकारी
जमीन से जुड़े इस गंभीर वन्यप्राणी अपराध के विधिक घटनाक्रम की कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- शिकार का मुख्य मास्टरमाइंड: वन विभाग की प्राथमिक विधिक पड़ताल में सामने आया है कि इस पूरे कांड का मुख्य विधिक सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि वन विभाग के ही एक विभागीय चौकीदार मिन्नता सिंह का सगा भाई प्रेम सिंह गोड़ है। प्रेम सिंह ने ही बिछियन के जंगलों में जंगली सुअर का अवैध शिकार करने के उद्देश्य से खतरनाक करंट का जाल बिछाया था, जिसकी विधिक चपेट में अंचल का यह बाघ आ गया।
- आरोपी के घर से मिले बाघ के नाखून: छापामार कार्रवाई के दौरान वन अमले ने एक अन्य नामजद आरोपी रामकुशल के घर की तलाशी ली, जहाँ से बाघ के दो बहुमूल्य नाखून विधिक रूप से बरामद किए गए हैं, जो इस अवैध शिकार की पुष्टि का सबसे बड़ा भौतिक सबूत हैं।
दो महीने तक जमीन के नीचे दफन रहा राज; मुखबिर की सटीक सूचना पर वन अमले ने कंकाल खोदकर निकाला
शिकारियों ने कानून की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिराना ढंग से सबूत मिटाने की साजिश रची थी:
- खुदाई में मिले क्षत-विक्षत अवशेष: यह खौफनाक राज करीब दो महीने तक जंगल की गहराइयों में दबा रहा। शुक्रवार को वन विभाग को मुखबिर तंत्र से एक पुख्ता विधिक इनपुट मिला। इसके तुरंत बाद कररिया बीट के जंगल में घेराबंदी कर चिन्हित स्थान पर खुदाई की गई, जहाँ से बाघ के सड़ चुके क्षत-विक्षत अवशेष और हड्डियां बरामद हुईं।
- फॉरेंसिक और डीएनए जांच से खुलेगा राज: अत्यधिक समय बीतने और शव के पूरी तरह गल जाने के कारण मौके पर पशु चिकित्सकों के लिए यह बताना असंभव था कि मृत बाघ नर था या मादा और उसकी अनुमानित उम्र कितनी थी। अब इन विधिक कड़ियों की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए अवशेषों को फॉरेंसिक लैब और डीएनए (DNA) परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
3 शिकारी गिरफ्तार, 5 अब भी फरार; पुराने अपराधों की भी खंगाल रही है पुलिस — रेंजर रंजन सिंह परिहार
प्रशासनिक मुस्तैदी और वन्यप्राणी संरक्षण की विधिक कार्रवाई —
“मझगवां वन परिक्षेत्र के रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मामले की विधिक कड़ियों को स्पष्ट करते हुए बताया कि चिन्हित 8 आरोपियों में से अधिकांश तागी, बिछियन और उसके आसपास के ग्रामीण अंचल के निवासी हैं. वन्यजीव अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत विधिक कार्रवाई करते हुए अब तक 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
रेंजर के अनुसार, आरोपी मिन्नता सिंह गोड़ को विभाग ने विशेष पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी रामकुशल कोल को कोर्ट में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा (Jail) में भेज दिया गया है. फरार 5 अन्य शिकारियों की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की विशेष विधिक टीमें जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं. इसके साथ ही पकड़े गए आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे पहले भी अंचल में सक्रिय किसी बड़े अंतरराज्यीय शिकार सिंडिकेट का हिस्सा रहे हैं।”







