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11 साल पुराने चेक बाउंस मामले में आया कोर्ट का बड़ा फैसला! रामनगर का पंकज गुप्ता दोषी करार; 7 लाख की मूल राशि पर 9% ब्याज देने का सख्त आदेश

11 साल पुराने चेक बाउंस मामले में आया कोर्ट का बड़ा फैसला! रामनगर का पंकज गुप्ता दोषी करार; 7 लाख की मूल राशि पर 9% ब्याज देने का सख्त आदेश

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The Khabrilal

Published On: Jun 25, 2026, 2:22 PM IST

Updated On: Jun 25, 2026, 2:22 PM IST

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रामनगर : विंध्य अंचल के रामनगर क्षेत्र से जुड़े एक दशक से भी अधिक पुराने और लंबे समय से लंबित चेक बाउंस (Check Bounce Case) के मामले में न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाला विधिक फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की प्रतिष्ठित अदालत ने रामनगर निवासी आरोपी पंकज गुप्ता को परक्राम्य लिखत अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी पर तगड़ा वित्तीय जुर्माना लगाने के साथ ही आदेश का पालन न करने पर जेल भेजने के भी कड़े निर्देश दिए हैं।दीपक ट्रेडिंग कंपनी बनाम पंकज गुप्ता; वर्ष 2015 से अदालत में लंबित था परिवाद

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न्यायालयीन विधिक दस्तावेजों और मुख्य पैरवी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की कड़ियां इस प्रकार हैं:

  • यह था पूरा मामला: यह विवाद दीपक ट्रेडिंग कंपनी द्वारा दायर एक परिवाद (Complaint Case) से जुड़ा हुआ था। आरोपी पंकज गुप्ता (पिता रामहित गुप्ता), निवासी रामनगर ने कंपनी के प्रति अपनी विधिक देनदारी चुकाने के लिए एक चेक जारी किया था।
  • नोटिस के बाद भी नहीं दिया पैसा: जब दीपक ट्रेडिंग कंपनी ने उक्त चेक को विधिक रूप से भुगतान के लिए बैंक में लगाया, तो वह पर्याप्त फंड न होने या अन्य तकनीकी कारणों से अनादरित (बाउंस) होकर वापस आ गया। इसके बाद कंपनी द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को विधिक रूप से डिमांड नोटिस भेजा गया, लेकिन नोटिस तामील होने के बावजूद आरोपी पंकज गुप्ता ने देय राशि का भुगतान नहीं किया। थक-हारकर वर्ष 2015 में कंपनी ने कोर्ट की शरण ली।

JMFC संजीत चौरसिया की अदालत ने सुनाया फैसला; मूल राशि पर लगेगा 9% का वार्षिक ब्याज

गुरुवार, 25 जून 2026 को मामले की अंतिम विधिक सुनवाई पूरी करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी संजीत चौरसिया की अदालत ने आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि का आदेश जारी किया:

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  1. धारा 138 एनआई एक्ट में दोषसिद्ध: अदालत ने अभियोजन और परिवादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड्स को सही पाया। कोर्ट ने माना कि आरोपी पंकज गुप्ता ने जानबूझकर चेक बाउंस किया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत विधिक रूप से दोषी ठहराया।
  2. प्रतिकर और ब्याज का सख्त हुक्म: माननीय जज ने अपने फैसले में आरोपी को आदेशित किया है कि वह दीपक ट्रेडिंग कंपनी को ₹7,00,000 (सात लाख रुपये) की मूल राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही, इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (Annual Interest) और निर्धारित प्रतिकर (Compensation) राशि भी परिवादी को अदा करनी होगी।

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न्यायालय का विधिक रुख और दंडात्मक आदेश —

“न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीत चौरसिया की कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि आरोपी को न्यायालय द्वारा तय की गई संपूर्ण प्रतिकर और ब्याज की राशि समय-सीमा के भीतर हर हाल में जमा करनी होगी। यदि आरोपी पंकज गुप्ता तय अवधि में इस पूरी विधिक प्रतिकर राशि को न्यायालय या परिवादी के पास जमा करने में असफल रहता है, तो ऐसी स्थिति में उसे 3 माह (तीन महीने) का साधारण कारावास (Simple Imprisonment) भुगतना होगा। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अंचल के व्यापारियों और लेन-देन के मामलों में धोखाधड़ी करने वाले तत्वों में हड़कंप है।”

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