मऊगंज: बदलते दौर में तेजी से पैर पसार रहे डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए मऊगंज जिला पुलिस ने कमर कस ली है। मऊगंज पुलिस अधीक्षक (SP) सुरेंद्र कुमार जैन के कुशल नेतृत्व में जिला पुलिस ने 24 जून से 15 दिवसीय विशेष ‘सेफ क्लिक अभियान 2.0’ (Safe Click Campaign 2.0) का शंखनाद किया है। एसपी जैन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे तकनीक के इस दौर में लालच और डर का शिकार होने से बचें, क्योंकि आपकी थोड़ी सी सतर्कता ही इन शातिर साइबर अपराधियों के मंसूबों को नाकाम कर सकती है।

सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल; कलेक्ट्रेट में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण
मध्य प्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय (PHQ) के निर्देश पर आयोजित इस अभियान की मुख्य विधिक कड़ियां इस प्रकार हैं:
- शीर्ष नेतृत्व का मार्गदर्शन: यह राष्ट्रव्यापी और प्रदेशव्यापी अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल तथा पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना के कुशल मार्गदर्शन में संपूर्ण मध्य प्रदेश में एक साथ शुरू किया गया है।
- मऊगंज में लाइव स्ट्रीमिंग: भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम का मऊगंज कलेक्ट्रेट सभागार में सीधा प्रसारण (Live Telecast) किया गया। इस दौरान जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अमला, मीडिया प्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के मुख्य विधिक संबोधन को सुना।
डिजिटल अरेस्ट, फेक KYC और नौकरी का झांसा; इन तरीकों से जालसाज साफ कर रहे हैं बैंक खाता
प्रेस वार्ता के दौरान एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने वर्तमान समय में साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे कुछ बेहद घातक ट्रेंड्स का खुलासा किया:
- गोपनीय जानकारी कभी न करें शेयर: एसपी ने चेताया कि कोई भी प्राधिकृत बैंक या सरकारी एजेंसी कभी भी फोन पर आपसे आपका बैंक खाता नंबर, एटीएम कार्ड का पिन, ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV) नंबर या नेट बैंकिंग का पासवर्ड नहीं मांगती है। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी यह व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी देना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
- संदेहास्पद लिंक पर क्लिक यानी धोखा: आजकल ठग फर्जी बैंक केवाईसी (KYC) अपडेट, भारी-भरकम लॉटरी, घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी और ऊंचे रिटर्न वाले फर्जी निवेश (Investment Plans) के नाम पर वाट्सएप और एसएमएस पर संदिग्ध लिंक भेजते हैं। इन लिंक पर किया गया एक सिंगल ‘क्लिक’ आपका पूरा खाता खाली कर सकता है। इसके अलावा, पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को वर्चुअली बंधक बनाने यानी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों से भी सावधान रहने की सख्त जरूरत है।
15 दिनों तक स्कूल, कॉलेज और पंचायतों में पुलिस लगाएगी विशेष चौपाल; सिखाएगी बचाव के गुर
मऊगंज पुलिस की जमीनी रणनीति और हेल्पलाइन का अमला —
“आगामी 15 दिनों तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत मऊगंज पुलिस की सायबर सेल और विभिन्न थानों की विशेष टीमें मैदानी स्तर पर सक्रिय रहेंगी। पुलिस की ये टीमें जिले के सभी शासकीय व निजी स्कूलों, कॉलेजों, व्यस्ततम व्यापारिक बाजारों, ग्राम पंचायतों और प्रमुख चौराहों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जाकर नुक्कड़ नाटक और कार्यशालाओं के जरिए लोगों को साइबर ठगी से बचाव की व्यावहारिक जानकारी देंगी। इसके साथ ही, यदि कोई व्यक्ति अनजाने में ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तत्काल गोल्डन ऑवर (शुरुआती 1 घंटा) के भीतर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (Cyber Helpline 1930) पर शिकायत दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी। एसपी ने ‘अंतिम छोर के व्यक्ति’ तक डिजिटल सुरक्षा पहुंचाने के लिए आम जनता से इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की है।”







