भोपाल: मध्य प्रदेश के करोड़ों नागरिकों और अन्नदाताओं का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। भीषण गर्मी और उमस की मार झेल रहे सूबे में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बुधवार, 24 जून 2026 को आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी है। मौसम केंद्र भोपाल (IMD) के मुताबिक, इस साल मानसून अपनी सामान्य तय तारीख (15 जून) की तुलना में करीब 9 दिन की देरी से आया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि खाड़ी में बने सिस्टम के कारण अब मानसून की रफ्तार बेहद तेज हो चुकी है और यह आगामी 3 से 4 दिनों के भीतर पूरे मध्य प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा।

बालाघाट में गिरे ओले, खंडवा-छिंदवाड़ा में झमाझम बारिश
मानसून के प्रवेश करते ही मालवा, निमाड़ और महाकौशल के अंचल में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है:
- यहाँ हुई पहली मानसूनी फुहार: खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और बालाघाट सहित कई दक्षिणी जिलों में घने बादलों के साथ तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है।
- ओलावृष्टि से बढ़ी टेंशन: बालाघाट जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में अचानक तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) भी दर्ज की गई है, जिससे किसानों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
राजधानी भोपाल में 4 इंच से ज्यादा पानी; इन 42 जिलों के लिए ‘येलो-ऑरेंज अलर्ट’
मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश के लगभग सभी बड़े संभागों के लिए आगामी 48 घंटों की विशेष चेतावनी जारी की है:
- इन जिलों में वज्रपात और आंधी का खतरा: मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा, सीहोर, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच और सिंगरौली समेत 42 प्रमुख जिलों में तेज आंधी, आकाशीय बिजली चमकने और मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है।
- पिछले 24 घंटे का रिपोर्ट कार्ड: बीते 24 घंटों में ही धार, झाबुआ, बड़वानी, सिवनी और मंडला सहित 39 जिलों में धूलभरी आंधी के साथ प्री-मानसून और मानसूनी बारिश ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। केवल भोपाल एकमात्र ऐसा जिला है, जहाँ अब तक 4 इंच से अधिक की रिकॉर्ड बारिश दर्ज की जा चुकी है।
जून में सामान्य से 53% कम बरसा पानी; सोयाबीन की बुवाई पिछड़ने से कृषि विशेषज्ञ चिंतित
खेती-किसानी पर मानसून की देरी का असर —
“मानसून के लेटलतीफ होने के कारण जून महीने में पानी का कोटा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 78.5 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान में महज 37.1 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड हो सकी है, जो सामान्य से 53 फीसदी कम है। बारिश की इस भारी कमी के कारण मालवा-निमाड़ के बेल्ट में सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बोनी बुरी तरह पिछड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक खेतों में कम से कम 3 से 4 इंच पानी गिरकर मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं आ जाती, तब तक किसान भाई जल्दबाजी में बुवाई न करें, अन्यथा बीज खराब होने का खतरा रहेगा।”
मौसम विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसूनी ट्रफ लाइन मध्य प्रदेश के मध्य हिस्से की ओर आगे बढ़ेगी, सूखे जैसे हालात और पानी की कमी में तेजी से सुधार होगा। हालांकि, शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर असमान बारिश और अचानक तेज रफ्तार हवाओं (Skymet) का दौर जारी रह सकता है।






