सतना, मध्य प्रदेश: मौत के बाद तेरहवीं और वर्षी की रस्में तो पूरी दुनिया निभाती है, लेकिन क्या आपने कभी किसी को जीते जी अपनी ही तेरहवीं का कार्ड बांटते और मृत्युभोज का आयोजन करते देखा है? मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के एक अनोखे किसान ने समाज के तानों से तंग आकर जीते जी अपनी तेरहवीं करने का ऐलान कर दिया है, जिसके कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

कौन हैं रामलोटन कुशवाहा?
यह अनोखा कदम उठाने वाले शख्स कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। उचेहरा क्षेत्र के अतरबेदिया निवासी रामलोटन कुशवाहा जड़ी-बूटियों और दुर्लभ पौधों के संरक्षण के लिए देश-दुनिया में मशहूर हैं।
- ‘मन की बात’ में तारीफ: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में रामलोटन के कार्यों की सराहना कर चुके हैं।
- राज्य स्तरीय सम्मान: साल 2024 में उन्हें भोपाल में जैव विविधता प्रोत्साहन का प्रथम श्रेणी का पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके ‘देशी म्यूजियम’ में दहीमन और भटकटैया जैसी कई विलुप्त होती वनस्पतियां मौजूद हैं।
क्यों लिया यह हैरान करने वाला फैसला?
इस अनोखे और भावुक कर देने वाले आयोजन के पीछे समाज का दोहरा रवैया और कड़वे ताने हैं।
- देहदान का लिया था संकल्प: रामलोटन ने कुछ समय पहले सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज में अपनी मृत्यु के बाद देहदान (Body Donation) करने का संकल्प लिया था।
- समाज ने मारे ताने: इस नेक काम की तारीफ करने के बजाय रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने ताने मारने शुरू कर दिए। लोगों ने कहना शुरू किया कि “तेरहवीं और वर्षी के खर्च से बचने के लिए देहदान का नाटक किया जा रहा है।”
- करारा जवाब देने की ठानी: इन तानों से आहत होकर रामलोटन ने समाज को अपनी ही भाषा में जवाब देने की ठानी। उन्होंने तय किया कि वे जीते जी अपनी तेरहवीं का आयोजन करेंगे ताकि किसी को यह न लगे कि वे खर्च से भाग रहे हैं।
13 मई 2026 को होगा मृत्युभोज
रामलोटन कुशवाहा ने बकायदा शोक संदेश वाले कार्ड छपवाए हैं और रिश्तेदारों व ग्रामीणों को न्योता भेजना शुरू कर दिया है। इस अनोखे कार्यक्रम की तारीख 13 मई 2026 तय की गई है।
“जब लोग मेरी तेरहवीं के खर्च पर सवाल उठा रहे हैं, तो मैं जीते जी ही उन्हें मृत्युभोज खिलाऊंगा।”
— रामलोटन कुशवाहा
अब यह आयोजन केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि रूढ़िवादी सोच और देहदान जैसे नेक काम पर उंगली उठाने वालों के मुंह पर एक बड़ा तमाचा बन चुका है। पूरे इलाके में इस अनोखे आयोजन को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है।






