उज्जैन/भोपाल : सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार को दिनभर भारी तनाव की स्थिति बनी रही। पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के बीच पुलिस-प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित किया। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 घंटे के भीतर 8 FIR दर्ज कर 20 लोगों को नामजद किया है, जिनमें से 15 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरे इलाके में 2,500 पुलिसकर्मियों का कड़ा पहरा तैनात किया गया है।

मस्जिद कमेटी की सहमति से शुरू हुई कार्रवाई, अफवाह फैलने पर भड़का उपद्रव
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि रविवार रात मस्जिद कमेटी और मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक में बनी सहमति के आधार पर सोमवार सुबह 8:45 बजे मस्जिद का बाधक हिस्सा स्वैच्छिक रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर मस्जिद को पूरी तरह ढहाए जाने की भ्रामक खबरें फैलने के बाद भीड़ उग्र हो गई और पथराव शुरू कर दिया। पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
शहर काजी के घर घेराव पर भी FIR, हाई कोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में दिया फैसला
घटनाक्रम के दौरान शहर काजी ने वीडियो जारी कर अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की, जिसके बाद आक्रोशित भीड़ ने उनके घर का घेराव कर नारेबाजी की। पुलिस ने शहर काजी की सुरक्षा बढ़ाकर 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मस्जिद कमेटी और नगर निगम के बीच बनी सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया और नगर निगम के पक्ष में फैसला सुनाया।
साइबर सेल की पैनी नजर: 5 सोशल मीडिया अकाउंट पर केस
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि माहौल बिगाड़ने वाली अफवाहें फैलाने वाले 5 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि 100 से ज्यादा आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटवाया गया है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट और भ्रामक जानकारी को शेयर न करें। फिलहाल मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और शांत है।










