सतना : डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर विंध्य क्षेत्र के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है। चित्रकूट और आईआईटी बिहटा के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग पर आधारित एक विशेष क्लाउड सिक्योरिटी डिटेक्टिंग डिवाइस की अवधारणा विकसित की है। यह प्रस्तावित एआई डिवाइस क्लाउड पर होने वाले साइबर हमलों, डेटा चोरी और संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखेगा और खतरा महसूस होते ही तत्काल सुरक्षा अलर्ट जारी करेगा।

चित्रकूट और आईआईटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया मॉडल
इस अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली को जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय (चित्रकूट) के डॉ. अमित अग्निहोत्री, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डॉ. देवरस पांडे व डॉ. गौरी शंकर कुशवाहा तथा आईआईटी बिहटा के शुभम कुमार सहित अन्य शोधकर्ताओं ने मिलकर विकसित किया है। यह डिवाइस अस्पतालों, बैंकों, विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों के संवेदनशील डेटा को हैकिंग और अनधिकृत एक्सेस से सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
मशीन लर्निंग से समझेगा ‘नॉर्मल’ पैटर्न, डेटा लीक होते ही लेगा एक्शन
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रणाली नेटवर्क में सामान्य गतिविधि (लॉगिन टाइम, डेटा ट्रांसफर लिमिट, यूजर बिहेवियर) को समझने के लिए LSTM (लॉन्ग शॉर्ट-टर्म मेमोरी) और रैंडम फॉरेस्ट जैसे एडवांस मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करती है। यदि किसी कर्मचारी के खाते से अचानक असामान्य समय पर लॉगिन हो, कोई चोरी के पासवर्ड से सिस्टम में घुसने की कोशिश करे या भारी मात्रा में डेटा अचानक बाहर भेजा जाए, तो एआई इसे तुरंत संदिग्ध मानकर अलर्ट करेगा।
केवल सूचना ही नहीं, खतरे पर तुरंत लगाएगा ब्रेक
यह सिस्टम केवल हैकिंग की सूचना देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स सिस्टम भी शामिल है। संदिग्ध गतिविधि पहचानते ही यह डिवाइस सुरक्षा नियमों के तहत संबंधित यूजर का एक्सेस ब्लॉक कर देगा और खतरे को अलग (आइसोलेट) कर देगा, जिससे साइबर हमले के असर को समय रहते पूरी तरह बेअसर किया जा सके।










