Sign In
/
/
रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध: आश्वासन पर जल सत्याग्रह अस्थायी रूप से स्थगित, लेकिन आंदोलन जारी

रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध: आश्वासन पर जल सत्याग्रह अस्थायी रूप से स्थगित, लेकिन आंदोलन जारी

[inb_subtitle]

विज्ञापन

प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Oct 28, 2026, 3:38 PM IST

Updated On: Oct 28, 2026, 3:38 PM IST

🔗 Link Copied!
🔗 Link Copied!
रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रोझौही और सरई कला में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट (Tata Nuclear Power Plant) के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना ‘जल सत्याग्रह’ कुछ दिनों के लिए रोक दिया है, लेकिन परियोजना के विरोध में बैठकों और प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक सरकार इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती हुए थे आंदोलनकारी

आंदोलन के दौरान पिछले दिनों स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने लगी:
  • जल सत्याग्रह और आमरण अनशन: 26 अक्टूबर की रात रोझौही गांव में तालाब के भीतर जल सत्याग्रह और आमरण अनशन कर रहे कुछ ग्रामीणों की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
  • अस्पताल में भर्ती: सूचना मिलते ही सिरमौर की नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा और स्थानीय ग्रामीण बबली कोल, रावेंद्र कोल व संदीप कोल को एम्बुलेंस की मदद से रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का समर्थन और अनोखे प्रदर्शन

इस आंदोलन को अब राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का भी बड़ा समर्थन मिलने लगा है:
  1. उमंग सिंघार का दौरा: गत 25 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार रोझौही पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों के इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि जब तक यह जनविरोधी प्रोजेक्ट वापस नहीं लिया जाता, कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।
  2. समर्थक संगठन: इस विरोध प्रदर्शन को ‘बिरसा मुंडा विचार क्रांति मंच’, विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इससे पहले विरोध दर्ज कराने के लिए क्योटी पंचायत भवन के सामने सांकेतिक फांसी पर लटककर भी अनोखा प्रदर्शन किया गया था।

प्रशासन का आश्वासन और ग्रामीणों की दो टूक मांग

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि आगामी कुछ दिनों तक प्लांट से जुड़ा कोई भी निर्माण कार्य या गतिविधि नहीं की जाएगी। इसी भरोसे के बाद जल सत्याग्रह को फिलहाल अस्थायी रूप से रोका गया है।
हालांकि, ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक शासन स्तर से टाटा न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव को रद्द करने की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और विरोध-प्रदर्शन यूं ही जारी रहेगा।
होम
MP ब्रेकिंग
Join करें
Join करें
मेन्यू