रीवा/विंध्य : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के जेल विभाग द्वारा जारी विशेष परिहार नीति के तहत केंद्रीय जेल रीवा से 7 उम्रकैदियों को समय पूर्व रिहा कर दिया गया। ये सभी बंदी भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। जेल प्रशासन के अनुसार, इन सभी बंदियों ने 14 साल की वास्तविक सजा और परिहार की अवधि जोड़कर कुल 20 वर्ष की सजा पूरी कर ली थी, जिसके बाद अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश जारी किया गया।

सिंगरौली के 3, शहडोल के 2 और अनूपपुर के 2 बंदियों को मिली आजादी
केंद्रीय जेल रीवा से रिहा किए गए 7 बंदियों में विंध्य और शहडोल संभाग के तीन जिलों के कैदी शामिल हैं। सिंगरौली जिले से शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37) और गुलाब सिंह गोंड़ (38) को रिहा किया गया है। वहीं अनूपपुर जिले से बच्चेलाल बसोर (58) व शंकरदयाल चौकसे (56) तथा शहडोल जिले से अमृतलाल बैगा (41) व श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54) को विशेष छूट का लाभ देते हुए जेल से रिहा किया गया।
सजा अवधि पूरी होने और अच्छे आचरण पर शासन ने दी राहत
जेल अधीक्षक के अनुसार, शासन द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पर्वों और विशेष अवसरों पर ऐसे कैदियों की सूची तैयार की जाती है जिन्होंने बिना किसी गंभीर शिकायत के अपनी अनिवार्य सजा अवधि पूरी कर ली हो। रीवा केंद्रीय जेल से रिहा हुए इन सातों कैदियों ने शासन की निर्धारित शर्तों और अर्हताओं को पूरा किया था। वर्षों बाद जेल की सलाखों से बाहर आने पर बंदियों के परिजनों के चेहरे खिल उठे और वे उन्हें अपने साथ घर ले गए।










