Sign In
/
/
रामनगर का ‘काली स्याही’ जैसा इतिहास: पहले भी फायर ब्रिगेड न होने से तड़पकर मर गया था मासूम; मानव अधिकार आयोग के नोटिस के बाद भी नहीं सुधरा प्रशासन

रामनगर का ‘काली स्याही’ जैसा इतिहास: पहले भी फायर ब्रिगेड न होने से तड़पकर मर गया था मासूम; मानव अधिकार आयोग के नोटिस के बाद भी नहीं सुधरा प्रशासन

[inb_subtitle]

विज्ञापन

The Khabrilal

Published On: Jun 9, 2026, 6:35 PM IST

Updated On: Jun 11, 2026, 12:18 PM IST

🔗 Link Copied!
🔗 Link Copied!

रामनगर: मासमासी रोड पर स्थित मातृछाया मेडिकल स्टोर में लगी भीषण आग ने एक बार फिर रामनगर के लापरवाह सिस्टम और नगर परिषद की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रामनगर में दमकल गाड़ी (फायर ब्रिगेड) का कबाड़ होना कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर में दमकल वाहन न होने के कारण एक मासूम बच्चे की जलकर दर्दनाक मौत हो चुकी है। उस खौफनाक हादसे के बाद देश के सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया था, लेकिन तमाम नोटिसों और फजीहत के बाद भी स्थानीय प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है।

Advertisement

जब मानवाधिकार आयोग ने कलेक्टर को थमाया था नोटिस

  • मासूम की मौत से हिला था अंचल: कुछ समय पहले रामनगर में हुई एक भीषण आगजनी के दौरान दमकल गाड़ी न पहुंचने की वजह से एक मासूम बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस हृदयविदारक घटना से पूरे विंध्य अंचल में भारी जनाक्रोश भड़क उठा था।
  • मानव अधिकार आयोग का संज्ञान: घटना की गंभीरता को देखते हुए मानव अधिकार आयोग (Human Rights Commission) ने मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था। आयोग ने इसे सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और नागरिक अधिकारों का हनन मानते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से जवाब तलब किया था।

हादसों से भी सबक नहीं: मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति

मानव अधिकार आयोग की सख्ती के बाद उम्मीद थी कि रामनगर की चरमराई अग्निशमन व्यवस्था में कोई स्थाई सुधार होगा और शहर को नई फायर ब्रिगेड मिलेगी। लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है:

  1. सिर्फ जवाबबाजी, काम शून्य: प्रशासन ने आयोग को कागजी जवाब सौंपकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न तो पुरानी गाड़ी को परमानेंट ठीक किया गया और न ही नए वाहन की व्यवस्था हुई।
  2. फिर टल गया बड़ा हादसा: मातृछाया मेडिकल स्टोर में लगी आग के दौरान अगर मासमासी रोड के सजग ग्रामीण और व्यापारी अपने स्तर पर पानी के टैंकरों का जुगाड़ नहीं करते, तो यह आग पूरी मार्केट को राख कर देती और एक बार फिर जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था।

जनता का फूटा सब्र: “अफसरों की जेब भरने के लिए बची है नगर परिषद”

रामनगर के प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले इन हादसों और मासूमों की मौतों के बाद भी कोई सुधार न होना यह साबित करता है कि स्थानीय नगर परिषद के अधिकारियों को जनता की जान की कोई परवाह नहीं है। दमकल विभाग के बजट और मेंटेनेंस के पैसों का बंदरबांट धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार मातृछाया मेडिकल स्टोर के अग्निकांड के बाद भी रामनगर को 24 घंटे चालू रहने वाली नई फायर ब्रिगेड नहीं मिली, तो इस बार लड़ाई आर-पार की होगी और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

Advertisement

होम
MP ब्रेकिंग
Join करें
Join करें
मेन्यू