पन्ना: देश-दुनिया में बहुमूल्य हीरों की नगरी के रूप में प्रसिद्ध मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक बार फिर हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। बारिश का मौसम बीतने के बाद नदियों और नालों में बहकर आने वाली ‘हीरे वाली चाल’ (कंकड़-पत्थर युक्त मिट्टी) में हीरा मिलने की आस में करीब 400 से 500 लोग नदी में उतर गए। मामला पन्ना के उत्तर वनमंडल अंतर्गत विश्रामगंज रेंज के रेंज डैम डूब क्षेत्र के पास का है। भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी और अवैध खनन की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और समझाइश देकर भीड़ को क्षेत्र से बाहर निकाला।

अस्थायी टेंट गाड़कर नदी के पानी में उतरी भीड़
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नदी और उसके आसपास के नाले में हीरा मिलने की खबर जंगल की आग की तरह पन्ना और आसपास के गांवों में फैल गई:
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लगाए अस्थायी तंबू: देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण कुदाल, छननी और बर्तन लेकर नदी किनारे पहुंच गए। कई लोगों ने तो वहां बाकायदा रात बिताने के लिए अस्थायी टेंट तक लगा लिए थे।
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पानी के बीच तलाशी: पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और युवक भी नदी के बहते पानी के बीच उतरकर चाल को छानते और हीरा तलाशते नजर आए।
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पर्यावरण व सुरक्षा पर खतरा: वन क्षेत्र से जुड़े होने के कारण इतनी बड़ी संख्या में इंसानी चहल-पहल से वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण पर गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
उत्तर वनमंडलाधिकारी के निर्देश पर वन अमले की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर वनमंडलाधिकारी धीरेंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में विश्रामगंज क्षेत्राधिकारी और वन अमले की विशेष टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
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भीड़ को खदेड़ा: वन विभाग की टीम ने लाउडस्पीकर और समझाइश के जरिए नदी में उतरे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और क्षेत्र खाली कराया।
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निगरानी बढ़ाई: वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना और किसी भी प्रकार का अवैध खनन या खुदाई करना पूरी तरह गैरकानूनी है। क्षेत्र में दोबारा भीड़ जमा न हो, इसके लिए गश्ती दल तैनात कर दिए गए हैं।
घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| घटनास्थल | विश्रामगंज रेंज डैम डूब क्षेत्र (उत्तर वनमंडल, पन्ना) |
| मुख्य वजह | बारिश के बाद बहकर आई चाल में हीरा तलाशने की कोशिश |
| भीड़ की संख्या | लगभग 400 से 500 ग्रामीण |
| प्रशासनिक अधिकारी | DFO धीरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देशन में वन अमले की कार्रवाई |
| वर्तमान स्थिति | क्षेत्र को खाली कराया गया; वन विभाग की टीम गश्त पर |
हर साल बारिश के बाद बनती है यही स्थिति
उल्लेखनीय है कि पन्ना की धरा गर्भाशय में बेशकीमती हीरे समेटे हुए है। मानसून के दौरान पहाड़ों और जंगलों से बहकर आने वाले पानी के साथ हीरों की चाल नदियों के कछार में जमा हो जाती है। हर साल स्थानीय लोग अपनी किस्मत आजमाने के लिए जान जोखिम में डालकर नदियों में उतरते हैं। हालांकि, वन विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना स्वीकृति वन सीमा में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









