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22 दिन के आतंक का खौफनाक अंत: 6 कुमकी हाथी और 150 जवान भी रहे फेल बाणसागर डैम में 5 किमी तैरकर शहडोल भागा ‘E-5’ हाथी!

22 दिन के आतंक का खौफनाक अंत: 6 कुमकी हाथी और 150 जवान भी रहे फेल बाणसागर डैम में 5 किमी तैरकर शहडोल भागा ‘E-5’ हाथी!

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 30, 2026, 2:50 AM IST

Updated On: Sep 30, 2026, 2:50 AM IST

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मैहर/अमरपाटन: मैहर वनमंडल में पिछले 22 दिनों से वन विभाग की टीम और ग्रामीणों को छकाने वाला कॉलर आईडी युक्त आक्रामक नर हाथी ‘E-5’ आखिरकार बाणसागर डैम पार कर शहडोल जिले के ब्यौहारी जंगलों में लौट गया है। सोमवार सुबह बाणसागर डैम के गहरे पानी में उतरा यह हाथी करीब 5 किलोमीटर तैरकर एक टापू से होते हुए सुरक्षित दूसरे छोर पर पहुंच गया। पानी में विशालकाय हाथी के तैरने का दुर्लभ वीडियो भी सामने आया है। इसके साथ ही मैहर के रामनगर और अमरपाटन इलाके में पिछले तीन हफ्तों से बना भारी दहशत का साया खत्म हो गया है और वन विभाग ने राहत की सांस ली है।
7-8 सितंबर को की थी एंट्री, किसान की जान लेने के बाद गोरसरी पहाड़ बना था ठिकाना
यह टस्कर 7-8 सितंबर की दरमियानी रात बाणसागर डैम पार कर मैहर के अमरपाटन रेंज में दाखिल हुआ था। आते ही इसने मौहारी गांव में मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था और खेत में रखवाली कर रहे किसान कंछेदी यादव को पटककर मार डाला था। इस वारदात के बाद हाथी ने गोरसरी पहाड़ के घने जंगलों को अपना ठिकाना बनाया। दिन में पहाड़ पर छिपने के बाद वह शाम ढलते ही बस्तियों और खेतों में घुसकर फसलों व मकानों को नुकसान पहुंचा रहा था।
रेस्क्यू ऑपरेशन रहा असफल, 6 कुमकी हाथी और 150 जवानों की टीम को छकाया
हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू में करने के लिए वन विभाग ने बांधवगढ़ से रामा, सूर्या, श्याम और लक्ष्मण समेत 6 प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को बुलवाया था। भारी मशीनरी, क्रेन और 150 से अधिक वनकर्मियों के साथ 23 सितंबर को रेस्क्यू का मेगा प्लान तैयार किया गया था। हालांकि, हाथी के लगातार लोकेशन बदलने और मूसलाधार बारिश के चलते ट्रेंकुलाइज करने का यह प्रयास विफल हो गया था।
रामनगर शहर में घुसा तो लोगों ने खदेड़ा, फिर 5 KM तैरकर पार किया बाणसागर डैम
अमरपाटन रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी के अनुसार, 27 सितंबर की रात करीब 10 बजे हाथी गोरसरी से निकलकर सीधे रामनगर के शहरी इलाके (वार्ड 7) में घुस गया था। बस्ती में दहशत फैलते ही लोगों ने गाड़ियों के तेज हॉर्न और शोर मचाकर उसे खदेड़ दिया। रामनगर से भागकर हाथी हरदुआ, गंजास, पुरैना और मड़करा होते हुए मैहर कैंप पहुंचा। इसके बाद 28 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे वह ललुआ बीट से बाणसागर डैम के अथाह पानी में कूद गया और करीब 5 किलोमीटर तैरकर शहडोल के ब्यौहारी क्षेत्र में चला गया। वन अमला अब भी सैटेलाइट कॉलर के जरिए उसके मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है।
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