सतना में PMGSY महाप्रबंधक के खिलाफ ठेकेदारों का ‘महा-हल्लाबोल’: दफ्तर के गेट पर धरने पर बैठे संविदाकार; जीएम उमेश साहू पर प्रताड़ना और कमीशनखोरी के आरोप, गाई रामधुन

सतना: विंध्य अंचल के सतना जिला मुख्यालय में सोमवार को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के कार्यालय में उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब विभाग की तानाशाही और लचर नीतियों से परेशान दर्जनों ठेकेदारों (संविदाकारों) ने दफ्तर के मुख्य गेट की विधिक घेराबंदी कर दी। महाप्रबंधक (GM) उमेश साहू की कार्यशैली, कथित भ्रष्टाचार और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ आक्रोशित ठेकेदारों ने गेट पर ही दरी बिछाकर उग्र धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान ठेकेदारों ने अनोखा विधिक विरोध जताते हुए महात्मा गांधी की तर्ज पर ‘रामधुन’ गाकर विभागीय अफसरों की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की।

पाइपलाइन और नहर निर्माण से टूट रहीं सड़कें; कम अंक देकर रोका जा रहा भुगतान

मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के नाम सौंपे गए विधिक ज्ञापन में ठेकेदारों ने भ्रष्टाचार के खेल की निम्नलिखित कड़ियाँ उजागर की हैं:

  • दूसरे विभागों की गलती, ठेकेदारों पर पेनल्टी: ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले में जल संवर्धन योजना के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी या संबंधित विभागों द्वारा मनमाने ढंग से पीएमजीएसवाई की पक्की सड़कों के शोल्डर खोदकर पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसी तरह नहर निर्माण के भारी-भरकम वाहनों और पोकलेन जैसी मशीनों के चलने से डामर की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
  • कम अंक देकर ब्लैकमेलिंग का खेल: ठेकेदारों का आरोप है कि दूसरे विभागों की वजह से टूटने वाली सड़कों की जिम्मेदारी भी दुर्भावनापूर्ण तरीके से मूल संविदाकारों पर मढ़ दी जाती है। निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक उमेश साहू द्वारा जानबूझकर सड़क की विधिक गुणवत्ता के नंबर (अंक) कम कर दिए जाते हैं, ताकि ब्लैकमेल कर अनावश्यक विधिक दबाव बनाया जा सके और पेंडिंग भुगतान (रनिंग बिल) को रोका जा सके।

गुलामों जैसा व्यवहार बंद करे विभाग; बजट का बहाना बनाकर भुगतान अटकाने की प्रथा पर लगे विधिक रोक

ठेकेदारों ने विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं और आर्थिक नुकसान को लेकर कई गंभीर विधिक मुद्दे उठाए हैं:

  1. समय-सीमा में हो फाइनल सेटलमेंट: प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि कार्य पूर्ण होने के बाद या रनिंग बिलों का भुगतान बिना किसी विधिक देरी या टेबल-मनी (कमीशन) की मांग के, एक निश्चित समय-सीमा (Time-Limit) के भीतर सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाए। बजट की कमी का कागजी बहाना बनाकर भुगतान रोकने की तानाशाही प्रथा को तत्काल समाप्त किया जाए।
  2. पारदर्शिता और दरों में संशोधन: संविदाकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार दरों (Market Rates) की तुलना में विभाग की निर्माण दरें बेहद कम हैं, अतः विधिक रूप से दरों में तत्काल व्यावहारिक संशोधन किया जाए। साथ ही ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाकर स्थानीय छोटे ठेकेदारों को काम के समान विधिक अवसर दिए जाएं।

“गुणवत्ता से समझौता नहीं, लेकिन मानसिक प्रताड़ना मंजूर नहीं” — संविदाकार संघ की कढ़ी चेतावनी

विधिक मांगें और आगामी बड़े आंदोलन की कड़ियाँ —

“सतना के वरिष्ठ बुनियादी ढांचा विश्लेषकों के अनुसार, पीएमजीएसवाई विभाग में ठेकेदारों के साथ ‘गुलामों’ जैसा व्यवहार किए जाने के इन आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है. ठेकेदारों ने स्पष्ट किया है कि वे शासन के विधिक मापदंडों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए महाप्रबंधक का सकारात्मक विधिक सहयोग और व्यावहारिक वातावरण आवश्यक है.

संविदाकार संघ ने जिला प्रशासन और भोपाल मुख्यालय को कड़ा विधिक अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि महाप्रबंधक उमेश साहू की मनमानी पर तत्काल विधिक रोक नहीं लगाई गई और पेंडिंग भुगतान जारी नहीं हुए, तो आगामी दिनों में पूरे विंध्य अंचल के ग्रामीण सड़क निर्माण कार्यों को पूरी तरह ठप (चक्काजाम) कर उग्र विधिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।”

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