भोपाल/सिंगरौली: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा राजनैतिक-प्रशासनिक विरोधाभास सामने आया है। राज्य सरकार ने दो-संतान नियम के उल्लंघन और गंभीर विभागीय अनियमितताओं के आरोप में सिंगरौली के उप-पंजीयक (Sub-Registrar) अशोक सिंह परिहार को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महानिरीक्षक (IG) पंजीयन अमित तोमर द्वारा यह कड़ा आदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस सार्वजनिक घोषणा के ठीक 48 घंटे बाद जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तीसरी संतान होने के आधार पर किसी भी सरकारी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी।

: 26 जनवरी 2001 के बाद जन्मी तीसरी संतान बनी फंदा
सिंगरौली कलेक्टर द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति और विभागीय जांच अधिकारी के प्रतिवेदन में उप-पंजीयक के खिलाफ आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए:
- तारीख बनी नौकरी जाने की वजह: जांच में सिद्ध हुआ कि शासकीय सेवा के दौरान अशोक सिंह परिहार की तीसरी संतान (पुत्र अभिषेक सिंह) का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था।
- क्या कहता है 1961 का नियम? मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य शर्तें) नियम 1961 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद यदि किसी भी कर्मचारी की दो से अधिक जीवित संतानें होती हैं, तो वह सरकारी सेवा के अयोग्य (Disqualified) माना जाता है। परिहार ने ‘नियमों की अज्ञानता’ का बहाना बनाकर बचने का दांव खेला, जिसे विभाग ने
- कानूनन खारिज कर दिया

करोड़ों की स्टाम्प चोरी और तगड़े रसूख का ‘सिंगरौली कनेक्शन’
इस हाई-प्रोफाइल बर्खास्तगी की इनसाइड स्टोरी सिर्फ तीसरी संतान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार का एक लंबा और विवादित इतिहास भी जुड़ा हुआ है:
- 1.10 करोड़ की स्टाम्प चोरी: सब-रजिस्ट्रार परिहार पर सिंगरौली में पदस्थापना के दौरान एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी चोरी कराने का गंभीर आरोप था, जिसके चलते वे पूर्व में सस्पेंड (निलंबित) भी हो चुके थे।
- 8 साल से एक ही जगह मलाईदार पोस्टिंग: स्थानीय स्तर पर वकीलों और दस्तावेज लेखकों के बीच यह गहरी चर्चा थी कि अपनी ऊंची राजनैतिक पहुंच और तगड़े रसूख के दम पर परिहार न सिर्फ निलंबन से बहाल हुए, बल्कि ट्रांसफर नियमों को ठेंगा दिखाकर दोबारा सिंगरौली में ही मलाईदार सीट पर काबिज हो गए थे। लंबे समय से जमी इस प्रशासनिक मनमानी को लेकर स्थानीय जनता और विभाग में भारी आक्रोश था।

सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से सेवाएं समाप्त
पंजीयन मुख्यालय का कड़ा फैसला —
“आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और तीन संतान से जुड़े वैधानिक साक्ष्य मिलने के बाद, मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा नीतिगत स्तर पर हो सकती है, लेकिन वर्तमान में लागू वैधानिक नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई है।”
आईजी पंजीयन कार्यालय के इस कड़े हंटर से मध्य प्रदेश के उन तमाम रसूखदार अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, जो दो से अधिक संतान होने के बावजूद राजनैतिक रक्षण के भरोसे नौकरी में बने हुए हैं। अब देखना यह होगा कि इस बर्खास्तगी के बाद क्या मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप नियमों में कोई संशोधन बैकडेट से लाया जाता है या परिहार की शासकीय पारी का यहीं अंत हो जाएगा।







