इंदौर से गूंजा वैश्विक कृषि का नया मंत्र: सर्वसम्मति से पारित हुआ ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’; मेघदूत उपवन में 21 देशों के मंत्रियों ने लगाई ‘ब्रिक्स वाटिका’

इंदौर: भारत की गरिमामयी अध्यक्षता में मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पिछले 5 दिनों से चल रहे ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों के महासम्मेलन का शुक्रवार (13 जून 2026) को शानदार समापन हो गया। 9 जून से शुरू हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक का अंत वैश्विक सर्वसम्मति से पारित ऐतिहासिक ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ (इंदौर घोषणा पत्र) के साथ हुआ। सम्मेलन के समापन के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इसे वैश्विक खाद्य सुरक्षा और कृषि के क्षेत्र में एक युगांतरकारी और ऐतिहासिक कदम बताया।

दुनिया की आधी आबादी और 42% कृषि पर ब्रिक्स का दबदबा

प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स समूह की ताकत और इस सम्मेलन के महत्व को आंकड़ों के जरिए रेखांकित किया:

  • वैश्विक उत्पादन का केंद्र: ब्रिक्स समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक कृषि उत्पादन (Global Agricultural Production) में अकेले इस समूह की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है।
  • तनाव के बीच उम्मीद की किरण: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, अनिश्चितता और तनाव का माहौल है, तब भारत की धरती पर आयोजित यह सम्मेलन पूरे विश्व के लिए आशा, अटूट विश्वास और आपसी सहयोग का एक मजबूत संदेश लेकर आया है। इस महामंथन में ब्रिक्स देशों के लगभग 100 शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

‘इंदौर डिक्लेरेशन’ की 3 बड़ी बातें: जो बदल देंगी खेती की तस्वीर

इस संयुक्त घोषणा पत्र के तहत कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तीन नए वैश्विक नेटवर्क और मंच स्थापित करने पर सर्वसम्मति बनी है:

  1. ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर ऑन एग्रो इकोलॉजी: इसके तहत प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने में भारत मुख्य भूमिका निभाएगा। रीजेनेरेटिव फार्मिंग को भविष्य की कृषि का आधार माना गया है।
  2. ब्रिक्स एग्रीकल्चर डिजिटल नेटवर्क: आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार (Innovation) को खेतों तक पहुंचाने के लिए इस डिजिटल नेटवर्क का गठन किया गया है, जिसका पूरा समन्वय (Coordination) आईआईपी दिल्ली (IIP Delhi) द्वारा किया जाएगा।
  3. ग्लोबल फोरम फॉर राइट Seeds: पारंपरिक, प्राचीन और देशी बीजों के संरक्षण और उनके संवर्धन के लिए इस विशेष वैश्विक मंच की स्थापना की जाएगी ताकि किसानों को जलवायु परिवर्तन के दौर में भी मजबूत बीज मिल सकें।

पर्यावरण को संदेश: मेघदूत उपवन में सजी ‘ब्रिक्स वाटिका’

यादों को हरियाली से जोड़ा —

इंदौर में आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन को चिरस्थायी और यादगार बनाने के लिए शहर के प्रसिद्ध मेघदूत उपवन में एक अनूठी पहल की गई। यहाँ विशेष रूप से “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण किया गया है। इस वाटिका में ब्रिक्स समूह और सहयोगी देशों से आए 21 देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने खुद अपने हाथों से फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया।

इस बेहद खास और हरित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, उद्यान प्रभारी पार्षद राजेंद्र राठौर सहित नगर निगम के आला अधिकारी मौजूद रहे। यह वाटिका आने वाले समय में न केवल इस ऐतिहासिक सम्मेलन की गवाह बनेगी, बल्कि इंदौर के पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास (Green Development) का एक बड़ा वैश्विक प्रतीक भी कहलाएगी।

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