
भोपाल वृद्धाश्रम में ढाई साल से रह रहे थे घनश्याम सिंह
घनश्याम सिंह मूल रूप से इंदौर के रहने वाले थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। जानकारी के अनुसार, वह पिछले करीब ढाई साल से भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में रह रहे थे।
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वृद्धाश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा के अनुसार, घनश्याम सिंह गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और बीमारी के कारण बोलने में भी असमर्थ थे। वृद्धाश्रम प्रबंधन उनकी देखभाल और इलाज करा रहा था।
भोपाल वृद्धाश्रम में मौत के बाद परिजनों ने आने से किया इनकार
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घनश्याम सिंह के निधन के बाद वृद्धाश्रम संचालिका ने उनकी बेटी को सूचना दी। आरोप है कि बेटी ने पिता से कोई संबंध नहीं होने की बात कहते हुए अंतिम संस्कार में आने से इनकार कर दिया।
इसके बाद दोनों बेटों से भी संपर्क किया गया। परिजनों ने भोपाल आने से मना करते हुए वृद्धाश्रम प्रबंधन से ही अंतिम संस्कार करने को कहा।
पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
परिजनों के अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार के बाद वृद्धाश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर घनश्याम सिंह का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कराया गया।
बीमारी में वृद्धाश्रम बना बुजुर्ग का सहारा
वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक घनश्याम सिंह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान परिवार के बजाय वृद्धाश्रम प्रबंधन ही उनकी देखभाल और उपचार में सहयोग कर रहा था।
यह मामला बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारी और बदलते सामाजिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भोपाल वृद्धाश्रम की घटना ने खड़े किए सवाल
70 वर्षीय घनश्याम सिंह की मौत के बाद परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार से इनकार किए जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। जिस उम्र में बुजुर्गों को परिवार के साथ और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है, उस समय उनका वृद्धाश्रम में अकेला जीवन और निधन के बाद परिजनों का अंतिम विदाई से दूर रहना कई सवाल खड़े करता है।






