
बांदा से मैहर कांवड़ यात्रा की हुई शुरुआत
सावन माह के अवसर पर ग्राम पंचायत बिराव में शिवभक्तों का जत्था एकत्रित हुआ। धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर मैहर के लिए रवाना हुए। भगवा वस्त्र धारण किए श्रद्धालु पूरे रास्ते भक्ति और अनुशासन के साथ पैदल यात्रा करेंगे।
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300 किलोमीटर से अधिक नंगे पांव सफर
बांदा से मैहर कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के सामने 300 किलोमीटर से अधिक की कठिन पदयात्रा की चुनौती है। खास बात यह है कि श्रद्धालु यह सफर नंगे पांव पूरा करने का संकल्प लेकर निकले हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि संयम, सेवा और आत्मअनुशासन का भी प्रतीक है।
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मैहर पहुंचने के बाद श्रद्धालु गंगाजल से मां शारदा मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और भगवान शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक करेंगे। श्रद्धालुओं की ओर से लोक कल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना भी की जाएगी।
सात्विक जीवन और सेवा का संकल्प
यात्रा के दौरान कांवड़िए सात्विक जीवनशैली और अनुशासन का पालन करने का संकल्प लेते हैं। लंबे सफर के दौरान रास्ते में सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से भोजन, पानी, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
श्रद्धालुओं के मुताबिक, सावन में भगवान शिव को पवित्र जल अर्पित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी धार्मिक भावना के साथ यह जत्था मैहर की ओर बढ़ रहा है।
मैहर पहुंचकर करेंगे गंगाजल से अभिषेक
बांदा से शुरू हुई यह कांवड़ यात्रा मैहर पहुंचने के बाद मां शारदा और भगवान शिव की आराधना के साथ पूरी होगी। श्रद्धालुओं का कहना है कि कठिन यात्रा के बावजूद उनकी आस्था और संकल्प उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
यात्रा का संक्षिप्त विवरण:
प्रारंभिक स्थान: ग्राम पंचायत बिराव, सोहनौली न्याय पंचायत, कमासिन, बांदा, उत्तर प्रदेश
गंतव्य: मां शारदा धाम, मैहर, मध्य प्रदेश
दूरी: 300 किलोमीटर से अधिक
यात्रा का माध्यम: नंगे पांव पैदल
मुख्य उद्देश्य: गंगाजल से मां शारदा और भगवान शिव के शिवलिंग का अभिषेक तथा लोक कल्याण की प्रार्थना








