मैहर। धुरंधर फिल्म विवाद में The Khabrilal की खबर का बड़ा असर हुआ है। अमरपाटन विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कठहा में कक्षा 11वीं के नाबालिग छात्रों को फिल्म का हिस्सा दिखाए जाने के मामले में पदस्थ अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच कराई थी। जिला शिक्षा अधिकारी, सतना/मैहर ने 6 अगस्त 2026 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया।
धुरंधर फिल्म विवाद में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई
मामला अमरपाटन विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कठहा का है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों को डीटीएच के माध्यम से ऐसी फिल्म का हिस्सा दिखाया गया, जिसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने वयस्क दर्शकों के लिए प्रमाणित किया है।
CBFC के अनुसार फिल्मों की प्रमाणन श्रेणियों में ‘A’ प्रमाणपत्र वयस्क दर्शकों के लिए प्रतिबंधित होता है। बोर्ड यह भी स्पष्ट करता है कि बच्चों को वयस्क दर्शकों के लिए प्रमाणित फिल्में दिखाना प्रमाणन नियमों के दायरे में आता है।
The Khabrilal की खबर के बाद जांच और कार्रवाई
धुरंधर फिल्म विवाद सामने आने के बाद मामले ने सोशल मीडिया और सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच बनाई। इसके बाद विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच कराई गई। विकासखंड शिक्षा अधिकारी अमरपाटन द्वारा कराई गई जांच में 31 जुलाई 2026 को कक्षा 11वीं में फिल्म का एक हिस्सा चलाए जाने का उल्लेख किया गया।
जांच के अनुसार उस दौरान अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह करीब दो घंटे तक कक्षा में मौजूद थे। विभाग ने इसी आधार पर शिक्षक की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए।
शिक्षक ने अपने स्पष्टीकरण में क्या कहा?
जांच के दौरान अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह ने अपने लिखित कथन में कहा कि विद्यार्थियों ने उनकी जानकारी के बिना स्मार्टफोन से फिल्म चला दी थी। शिक्षक ने यह भी कहा कि उन्हें स्वयं स्मार्टफोन चलाना नहीं आता।
हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण को गैर-जिम्मेदाराना और अस्वीकार्य माना। विभाग के अनुसार शिक्षक की जिम्मेदारी थी कि कक्षा में विद्यार्थियों के बीच अनुशासन और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी सुनिश्चित की जाए।
धुरंधर फिल्म विवाद में अतिथि शिक्षक की सेवा समाप्त
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश में संबंधित शिक्षक की लापरवाही को कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता माना गया। आदेश के अनुसार इस घटना से विभाग और विद्यालय की छवि भी धूमिल हुई।
इसी आधार पर अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
नाबालिग छात्रों को फिल्म दिखाने पर उठे थे सवाल
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह था कि विद्यालय में पढ़ने वाले नाबालिग विद्यार्थियों के बीच ऐसी फिल्म का प्रदर्शन कैसे हुआ। स्कूल में शिक्षक की मौजूदगी में फिल्म चलने के बाद निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे।
The Khabrilal द्वारा सामने लाए गए इस मामले के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि विद्यालय में विद्यार्थियों को दिखाए जाने वाले कंटेंट और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर विभाग ने गंभीरता दिखाई है।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद क्या?
अतिथि शिक्षक की सेवा समाप्त किए जाने के बाद अब मामला विभागीय रिकॉर्ड में कार्रवाई तक पहुंच गया है। वहीं, स्कूलों में विद्यार्थियों को दिखाए जाने वाले डिजिटल कंटेंट की निगरानी और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
धुरंधर फिल्म विवाद में हुई इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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