उमरिया। उमरिया राशन संकट लगातार गहराता नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के ग्राम कोहका-47 के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र होने के बावजूद उन्हें पिछले तीन महीनों से सरकारी राशन नहीं मिला। इससे गरीब परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परेशान ग्रामीण मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल राशन वितरण कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उमरिया राशन संकट: तीन महीने से राशन नहीं मिलने का आरोप
कोहका-47 गांव के ग्रामीणों ने राशन वितरण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि शासकीय उचित मूल्य की दुकान से पिछले तीन महीने से अनाज का वितरण नहीं किया गया। कई बार संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर गरीब परिवार भूख और अभाव का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश परिवार मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। राशन नहीं मिलने से उन्हें बाजार से महंगा अनाज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है। कई परिवारों के सामने दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उमरिया राशन संकट का असर सबसे ज्यादा गरीब और मजदूर परिवारों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और सभी पात्र हितग्राहियों को तीन महीने का लंबित राशन तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर राशन मिलता तो उन्हें इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
फिलहाल उमरिया राशन संकट को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद सरकारी राशन वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पात्र हितग्राहियों को उनका हक कब तक मिल पाता है।

