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खबर का असर: धुरंधर फ़िल्म प्रदर्शन विवाद में प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस

खबर का असर: धुरंधर फ़िल्म प्रदर्शन विवाद में प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस

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मैहर के कठहा शासकीय विद्यालय में धुरंधर फ़िल्म प्रदर्शन विवाद के बाद डीईओ द्वारा प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी।
— 11 के छात्रों को धुरंधर फ़िल्म दिखाने के मामले में खबर का असर। मैहर के कठहा शासकीय विद्यालय के प्राचार्य को डीईओ ने कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा।

The Khabrilal

Published On: Aug 5, 2026, 10:24 AM IST

Updated On: Aug 5, 2026, 10:28 AM IST

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मैहर के कठहा शासकीय विद्यालय में धुरंधर फ़िल्म प्रदर्शन विवाद के बाद डीईओ द्वारा प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी।
11 के छात्रों को धुरंधर फ़िल्म दिखाने के मामले में खबर का असर। मैहर के कठहा शासकीय विद्यालय के प्राचार्य को डीईओ ने कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा।

 

MAIHAR: मैहर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कठहा में कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों को व्यावसायिक फ़िल्म ‘धुरंधर’ दिखाए जाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने विद्यालय के प्राचार्य को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करते हुए तीन दिवस के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जारी नोटिस के अनुसार विद्यालय की कक्षा 11वीं विज्ञान संकाय में स्थापित स्मार्ट टीवी पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से ‘ए’ (Adults Only) प्रमाणित व्यावसायिक फ़िल्म ‘धुरंधर’ का प्रदर्शन किया गया। जबकि उक्त कक्षा में अध्ययनरत अधिकांश छात्र-छात्राएं नाबालिग हैं। शिक्षा विभाग ने इसे विद्यार्थियों के बौद्धिक, मानसिक एवं नैतिक विकास के प्रतिकूल माना है।

डीईओ द्वारा जारी सूचना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना विधिक अनुमति किसी व्यावसायिक फ़िल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन करना बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है तथा यह कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के अंतर्गत दंडनीय हो सकता है। साथ ही फ़िल्म में प्रदर्शित हिंसात्मक एवं अन्य आपत्तिजनक दृश्य बाल मन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

नोटिस में कहा गया है कि विद्यालय परिसर में इस प्रकार का प्रदर्शन शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही है तथा यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत आचरण की श्रेणी में आता है। इसलिए प्राचार्य को तीन दिवस के भीतर अपना तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीईओ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता अथवा स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया जाता है, तो संबंधित प्राचार्य के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।

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