रामनगर में एसडीएम एस.पी. मिश्रा का कड़ा विधिक रुख: विभागीय समीक्षा बैठक में बोले— योजनाओं में लेती-देती और लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं; अफसर बढ़ाएं जमीनी दौरा

रामनगर/मैहर: मैहर जिले के रामनगर जनपद पंचायत सभागार में सोमवार को प्रशासनिक मुस्तैदी और शासकीय योजनाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभागीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं राजस्व अधिकारी (SDM) एस.पी. मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय विधिक महामंथन में क्षेत्र के विकास और आमजन की समस्याओं के त्वरित निपटारे को लेकर कड़े विधिक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में एसडीएम ने दोटूक लहजे में अधिकारियों को चेताया कि शासन की कल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनपद सभागार में चार प्रमुख विभागों का हुआ विधिक एक्स-रे; पेंडिंग फाइलों पर मांगी रिपोर्ट

समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक अमले द्वारा जांची गई मुख्य विधिक व विकास कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • विभागवार गहन समीक्षा: बैठक के दौरान महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा राजस्व विभाग के अंतर्गत चल रहे मैदानी कार्यों का विधिक एक्स-रे किया गया। विभिन्न जनहितैषी योजनाओं की प्रगति, बजट आवंटन, हितग्राहियों को मिलने वाले लाभ और महीनों से लंबित पड़े विधिक प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की विभागवार फाइलों को खंगाला गया।
  • समय-सीमा में निराकरण का अल्टीमेटम: एसडीएम एस.पी. मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता से जुड़े सीमांकन, नामांतरण, पेंशन या स्वास्थ्य योजनाओं के मामलों में बेवजह की विधिक देरी न की जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर समय-सीमा (Time-Limit) के भीतर फाइलों का निपटारा करें, ताकि ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

“क्षेत्रीय भ्रमण बढ़ाकर देखें जमीनी हकीकत, दफ्तरों से बाहर निकलें अधिकारी” — एसडीएम एस.पी. मिश्रा

प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम ने मैदानी निरीक्षण पर विशेष जोर दिया:

  1. कमियों का तत्काल विधिक सुधार: एसडीएम ने निर्देशित किया कि अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित विधिक भ्रमण बढ़ाएं। आंगनबाड़ियों, स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम पंचायतों के जमीनी स्तर पर जाकर निरीक्षण करें और जहाँ भी कमियां मिलें, उनका विधिक रूप से तुरंत समाधान करें।
  2. जवाबदेही सर्वोपरि: उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के पात्र व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना और पूरी ईमानदारी व पारदर्शिता से कार्य करना सभी अधिकारियों का प्राथमिक विधिक दायित्व है।

महिला बाल विकास डीपीओ राजेंद्र बांगड़े और जनपद सीईओ भारती दीक्षित सहित कई जिला स्तरीय अधिकारी रहे मौजूद

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी विधिक निगरानी की कड़ियाँ —

“इस महत्वपूर्ण विभागीय समीक्षा बैठक में अंचल के लगभग सभी विभागों के शीर्ष मुखिया विधिक रूप से मौजूद रहे. मुख्य रूप से जिला कार्यक्रम अधिकारी (WCD) राजेंद्र बांगड़े, जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) भारती दीक्षित, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. आलोक अवधिया, नायब तहसीलदार ललित धार्वे, रामनगर थाना प्रभारी विजय त्रिपाठी और सहायक परियोजना अधिकारी (APO) अजय सिंह सहित कई विधिक पर्यवेक्षक व खंड स्तरीय कर्मचारी उपस्थित थे.

बैठक के अंतिम चरण में एसडीएम द्वारा सभी विभागों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगामी 15 दिनों का विधिक टारगेट दिया गया है. रामनगर अंचल के नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि इस कड़े प्रशासनिक रुख के बाद सोसायटियों, अस्पतालों और राजस्व अदालतों के चक्कर काट रहे गरीब किसानों व ग्रामीणों को बड़ी विधिक राहत मिल सकेगी।”

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