भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र से सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने आई है। सुदामा नगर इलाके में अकेले रह रहे एक बुजुर्ग दंपति की उनके ही घर की चार दीवारों के भीतर संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। बंद दरवाजे के पीछे जिंदगी कब खामोश हो गई, इसकी भनक कई दिनों तक न तो पड़ोसियों को लगी और न ही उनके बाहर रह रहे बच्चों को। जैसा कि घटना स्थल की संलग्न विधिक तस्वीर में देखा जा सकता है, ऐशबाग थाना पुलिस (Bhopal Police – Aishbagh PS) की गाड़ियां और एफएसएल (FSL) की बर्न/क्राइम सीन यूनिट की टीम रात के वक्त मौके पर तैनात है। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे (Crime Scene Tape) में ले लिया गया है और शवों को स्ट्रेचर के माध्यम से पोस्टमार्टम के लिए एम्बुलेंस तक पहुँचाने की विधिक कवायद की जा रही है। इस खौफनाक मंजर को देखने के लिए सड़क पर स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जमा है।

जब किरायेदार किराया देने पहुंचा, तब खटखटाने पर भी नहीं खुला दरवाजा
ऐशबाग थाना पुलिस और पड़ोसियों से मिली प्राथमिक व आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा इस प्रकार हुआ:
- किरायेदार की सजगता से खुला राज: सुदामा नगर स्थित इस मकान में रहने वाले बुजुर्ग मकान मालिक से मिलने जब उनका किरायेदार सामान्य रूप से किराया देने के लिए पहुंचा, तब यह सच सामने आया। किरायेदार ने काफी देर तक मुख्य दरवाजा खटखटाया और आवाजें दीं, लेकिन अंदर से कोई हलचल या प्रतिक्रिया नहीं मिली।
- दरवाजा तोड़ते ही फैली सनसनी: लगातार दस्तक के बाद भी जब जवाब नहीं मिला, तो किरायेदार को किसी अनहोनी का विधिक अंदेशा हुआ। उसने तुरंत आसपास के पड़ोसियों को जुटाया और ऐशबाग पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब दरवाजा तोड़ा, तो भीतर का नजारा देखकर सबके होश उड़ गए। घर के अंदर पति और पत्नी दोनों के शव क्षत-विक्षत और सड़ने (Decompose) की एडवांस स्टेज में पड़े हुए थे, जिससे पूरे इलाके में तीखी बदबू फैल गई थी।
लंबे समय से अकेले रह रहे थे बुजुर्ग; पड़ोसियों ने बदबू को भी किया नजरअंदाज
जांच में महानगरों की संवेदनहीनता और अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर पहलू सामने आए हैं:
- बाहर रहते हैं बच्चे: मृतकों की पहचान हेमंत बारीक और उनकी पत्नी शकुंतला बारीक के रूप में हुई है। पड़ोसियों के मुताबिक, यह बुजुर्ग दंपति लंबे समय से इस घर में पूरी तरह अकेला रह रहा था। उनके बच्चे भोपाल से बाहर दूसरे शहरों/राज्यों में रहते हैं, जिनका घर पर आना-जाना बेहद कम था।
- गैर-मौजूदगी पर किसी का ध्यान नहीं: दंपति स्वभाव से काफी शांत थे और खुद भी घर से बहुत कम बाहर निकलते थे। यही वजह है कि जब वे कई दिनों तक घर से बाहर नहीं दिखे, तो किसी ने उनकी गैर-मौजूदगी को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, पड़ोसियों ने स्वीकार किया कि उन्हें पिछले कुछ समय से हवा में तीखी बदबू महसूस हो रही थी, लेकिन किसी ने भी इसकी विधिक सूचना समय रहते पुलिस को देने की जहमत नहीं उठाई।
हत्या, आत्महत्या या बीमारी? पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत की वजह का राज
पुलिस प्रशासन की थ्योरी और विधिक तफ्तीश —
“तस्वीर
watermarked_img_2282129974967153768.pngमें फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स सफेद सुरक्षा सूट (PPE Kit) पहनकर घर के भीतर से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाते नजर आ रहे हैं। ऐशबाग पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि शव कई दिन पुराने होने के कारण पूरी तरह सड़ चुके हैं, इसलिए शुरुआती तौर पर मौत के सटीक विधिक कारणों का अंदाजा लगाना मुश्किल है। पुलिस वर्तमान में इस अंधे मामले को सुलझाने के लिए आत्महत्या (Suicide), सुनियोजित हत्या (Murder) या अचानक किसी गंभीर बीमारी या साइलेंट अटैक के चलते हुई मौत— इन तीनों ही विधिक संभावनाओं को सामने रखकर गहनता से जांच कर रही है। पुलिस ने शवों को पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम (Autopsy) के लिए मर्चुरी भेज दिया है। पोस्टमार्टम की विस्तृत विधिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि दंपति की मौत असल में किस दिन और किन परिस्थितियों में हुई थी। फिलहाल बाहर रहने वाले बच्चों को विधिक सूचना दे दी गई है।”







