भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे ग्रामीण इलाकों में खनिज और वन विभाग के नियमों को ठेंगा दिखाकर अवैध उत्खनन (Illegal Mining) का काला कारोबार प्रशासनिक नाक के नीचे तेजी से फल-फूल रहा है. रसूखदार खनिज माफियाओं ने सारे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध खेल किसी सुदूर जंगल में नहीं, बल्कि बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के शाहपुर में स्थित आनंद तीर्थ सरस्वती शिशु मंदिर, माता केरी विद्यालय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कैंपस से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर लगातार हो रही विधिक शिकायतों के बावजूद खनिज, वन और पुलिस विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं, जिससे क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है.

हरे-भरे जंगल का मिटाया नामोनिशान; स्कूल के बच्चों पर मंडराया खतरा
स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं से मिली जमीनी जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध सिंडिकेट का ब्योरा इस प्रकार है:
- मिटा दिया जंगल का वजूद: माफिया ने अपने रसूख और राजनैतिक धौंस का इस्तेमाल कर अनुमति से कहीं अधिक पेड़ों की अवैध कटाई कर डाली और देखते ही देखते कई एकड़ में फैले हरे-भरे जंगल को मैदान में तब्दील कर दिया.
- नौनिहालों की जान जोखिम में: स्कूल और खेल मैदान के बिल्कुल नजदीक गहरी खदानें खोद दिए जाने के कारण यहाँ पढ़ने वाले सैकड़ों स्कूली बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी है. वर्तमान में बारिश का मौसम शुरू होने से इन गहरी खदानों में पानी भर गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है. बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनके अभिभावक बेहद चिंतित हैं.
बिना रॉयल्टी रोजाना निकल रहे 250 से 300 हाइवा; एक ही पर्ची पर हो रहा खेल
जांच और जमीनी इनपुट में परिवहन व रॉयल्टी चोरी की गंभीर विधिक गड़बड़ियां सामने आई हैं:
- चोरी की मुरम से भरा जा रहा पेट: क्षेत्र में तरुण सिंह उर्फ बिट्टू ठाकुर, सोनू सिसोदिया और अमन सिकनिया के संरक्षण व संचालन में यह पूरा नेटवर्क काम कर रहा है. रोज़ाना खदानों से लगभग 250 से 300 हाइवा और डंपर गाड़ियां बिना किसी वैध रॉयल्टी पर्ची के धड़ल्ले से मुरम और कोपरा निकालकर परिवहन कर रही हैं.
- रॉयल्टी व्यवस्था में भारी हेरफेर: शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि यदि कभी जांच का डर होता है, तो ये माफिया महज एक ही वैध रॉयल्टी पर्ची (Royalty Slip) के सहारे रातों-रात दर्जनों वाहनों को अवैध रूप से मुख्य सड़कों से पास करा देते हैं. कई गाड़ियां तो बिना किसी विधिक दस्तावेज के ही बेखौफ दौड़ रही हैं.
कलेक्टर बदलते ही माफिया हुए हावी; पूर्व में मस्तीपुरा में भी काटे थे 8000 सागौन के पेड़
माफिया का पुराना रिकॉर्ड और प्रशासनिक शिथिलता —
“स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, बैरसिया क्षेत्र में तत्कालीन कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान इस सिंडिकेट पर सख्त विधिक शिकंजा कसा था, जिससे अवैध उत्खनन पर पूरी तरह रोक लग गई थी. लेकिन जैसे ही जिले की प्रशासनिक कमान बदली, खनिज माफिया दोबारा सक्रिय और बेलगाम हो गए. इन आरोपियों का पुराना विधिक रिकॉर्ड भी बेहद दागदार रहा है. करीब 7-8 महीने पहले इन्हीं रसूखदारों ने मस्तीपुरा के बीनापुर में खसरा नंबर 2 की शासकीय भूमि पर धावा बोलकर 8000 से अधिक बेशकीमती सागौन के पेड़ रातों-रात उजाड़ दिए थे और दूसरी खदान की लीज दिखाकर सरकारी जमीन का सीना छलनी कर दिया था. उस मामले में भी भारी विधिक शिकायतें की गई थीं, परंतु ठोस दंडात्मक कार्रवाई न होने के कारण आज इनके हौसले बुलंद हैं.”
बैरसिया की जनता और जागरूक नागरिकों की निगाहें अब भोपाल जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पर्यावरण विंग की अगली दंडात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस सिंडिकेट पर कोई बड़ा विधिक प्रहार होगा या धरती का सीना यूँ ही छलनी होता रहेगा.







