सतना: देश के सबसे व्यस्त और संवेदनशील रेल मार्गों में शुमार मुंबई-हावड़ा रेलखंड पर गुरुवार (18 जून 2026) की सुबह एक बेहद दुस्साहसिक वारदात सामने आई। कटनी-सतना रेलखंड के बीच स्थित लगरगवां रेलवे स्टेशन के पास कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा खुलेआम सिग्नल वायर काटकर चोरी की जा रही थी। इस चोरी के कारण रेलवे की पूरी सिग्नल प्रणाली अचानक ठप हो गई, जिससे अप और डाउन ट्रैक की कुल 19 यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। गनीमत यह रही कि रेलवे के ऑटोमैटिक सिस्टम ने समय रहते तकनीकी खराबी को पकड़ लिया, जिससे हजारों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ने से बच गई और एक बड़ा रेल हादसा टल गया।

सुबह 9:30 बजे कंट्रोल रूम में मचा हड़कंप
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्टेशन प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम का विवरण इस प्रकार है:
- सिग्नल सिस्टम हुआ फेल: गुरुवार सुबह लगभग 9:30 बजे अचानक लगरगवां सेक्शन का मुख्य सिग्नल ठप हो गया, जिससे ट्रेनों की रफ्तार थमने लगी। कंट्रोल रूम को तकनीकी व्यवधान का अलर्ट मिलते ही तकनीकी टीम और आरपीएफ को मौके पर रवाना किया गया।
- ट्रैक पर तार काटते मिलीं महिलाएं: जब सुरक्षा बल की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां दो महिलाएं कटर की मदद से सिग्नल को ऑपरेट करने वाले कीमती कॉपर वायर को काट रही थीं। आरपीएफ ने घेराबंदी कर दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया।
सतना की रहने वाली हैं दोनों आरोपी महिलाएं; 7 मीटर तार बरामद
आरपीएफ थाना प्रभारी वीरेन्द्र यादव के नेतृत्व में की गई इस त्वरित कार्रवाई में पकड़ी गई महिला आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:
- कल्ली उर्फ सुखवंती (उम्र 55 वर्ष) – निवासी: नारायण तालाब, वार्ड क्रमांक-22, सतना।
- चिंतामणि (उम्र 55 वर्ष) – निवासी: संग्राम कॉलोनी, सतना।
माल और जब्ती: आरपीएफ ने आरोपियों के पास से मौके पर काटा गया लगभग 7 मीटर लंबा सिग्नल वायर बरामद किया है, जिसकी सरकारी कीमत करीब दो हजार रुपये आंकी गई है। दोनों आरोपियों के खिलाफ रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर स्थानीय रेलवे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़: 4 से 5 मिनट तक लेट हुईं गाड़ियाँ
सुरक्षा विशेषज्ञों और आरपीएफ की चिंता —
“रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस कृत्य के कारण रूट पर चल रही 19 ट्रेनों को कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विभिन्न आउटरों पर रोकना पड़ा। हालांकि, मुस्तैद तकनीकी टीम ने त्वरित मरम्मत कर ट्रेनों की देरी को महज 4 से 5 मिनट तक ही सीमित रखा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे की सिग्नल व्यवस्था ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही की रीढ़ (Backbone) होती है। इसमें मामूली छेड़छाड़ भी किसी भी समय दो तेज रफ्तार ट्रेनों को आपस में टकरा सकती है, जो बेहद आत्मघाती है।”
बड़ा सवाल: क्या केवल मोहरे हैं ये महिलाएं, कौन है कबाड़ माफिया?
इस घटना ने सतना जिले में सक्रिय कबाड़ और रेल संपत्ति चोरों के एक बड़े संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा किया है। जानकारों का कहना है कि 55 साल की बुजुर्ग महिलाएं केवल इस नेटवर्क का एक अदना सा मोहरा हैं। असल में इस महंगी कॉपर वायर को ऊंचे दामों पर खरीदने और बिकवाने वाला कोई बड़ा गिरोह पृष्ठभूमि में सक्रिय है। आरपीएफ थाना प्रभारी वीरेंद्र यादव के अनुसार, पुलिस अब इन महिलाओं के पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ सतना और कटनी के उन कबाड़ियों की सूची तैयार कर रही है, जो चोरी की रेल सामग्री की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल हैं।







