Sign In
/
/
इंदौर हाईकोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार: 9 करोड़ के इंजेक्शन के लिए जूझ रही मासूम; कोर्ट ने पूछा- “लाड़ली बहना योजना में करोड़ों दे रहे, तो क्या यह बच्ची प्रदेश की लाड़ली नहीं?”

इंदौर हाईकोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार: 9 करोड़ के इंजेक्शन के लिए जूझ रही मासूम; कोर्ट ने पूछा- “लाड़ली बहना योजना में करोड़ों दे रहे, तो क्या यह बच्ची प्रदेश की लाड़ली नहीं?”

[inb_subtitle]

विज्ञापन

The Khabrilal

Published On: Jun 18, 2026, 8:32 PM IST

Updated On: Jun 18, 2026, 8:32 PM IST

🔗 Link Copied!
🔗 Link Copied!

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्थित मप्र उच्च न्यायालय (High Court) की इंदौर खंडपीठ ने साढ़े तीन साल की मासूम अनिका शर्मा के इलाज को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित मासूम अनिका की जिंदगी बचाने के लिए 9 करोड़ रुपये के एक विशेष इंजेक्शन की दरकार है। इस मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने भावुक और कड़ा रुख अपनाते हुए शासकीय अधिवक्ताओं से सीधे पूछा कि— “जब मध्य प्रदेश में सवा करोड़ से अधिक महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, तो क्या यह मासूम बच्ची सरकार की लाड़ली नहीं है?”

Advertisement

जनता ने क्राउड फंडिंग से जुटाए 8 करोड़, पर समय अब रेत की तरह फिसल रहा

अदालत में अनिका की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने बच्ची की गंभीर स्थिति का पूरा विवरण प्रस्तुत किया:

  • 8 महीने से जारी है माता-पिता का संघर्ष: अनिका का परिवार बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर है। इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके वश में नहीं था, लेकिन बीते 8 महीनों से माता-पिता ने दिल्ली, मुंबई और इंदौर समेत कई शहरों में क्राउड फंडिंग (Crowd Funding) के जरिए झोली फैलाई। जनता के सहयोग से अब तक करीब 7 से 8 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच के फासले को मिटाने के लिए अब भी करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये कम पड़ रहे हैं।
  • 1.5 किलो वजन बढ़ते ही बेअसर हो जाएगा इंजेक्शन: डॉक्टरों के अनुसार, इस बेहद महंगे जीवनरक्षक इंजेक्शन का असर तभी संभव है जब बच्ची का वजन 13 किलोग्राम से कम हो। वर्तमान में अनिका का वजन 11.5 किलोग्राम हो चुका है और वह केवल लिक्विड डाइट (तरल आहार) पर है। परिवार के पास अब और संसाधन या समय शेष नहीं बचा है।

लाड़ली बहना योजना का हवाला देकर बची राशि देने की मांग; एम्स दिल्ली की लापरवाही उजागर

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि यदि सरकार अपनी राजनैतिक इच्छाशक्ति दिखाए, तो बची हुई राशि पल भर में स्वीकृत हो सकती है:

Advertisement

  1. विशेष प्रावधान की मांग: वकीलों ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं को हर महीने करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता बांट रही है। यदि सरकार इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान या किसी विशेष बजटीय प्रावधान के तहत आगे आए, तो अनिका के इलाज की शेष राशि तुरंत एम्स भेजी जा सकती है।
  2. कोर्ट में नहीं पहुंचा AIIMS का वकील: कोर्ट ने इस मामले में देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) को भी मुख्य पक्षकार बनाया था, क्योंकि बच्ची का इलाज वहीं चल रहा है। लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से सुनवाई के दौरान एम्स प्रबंधन की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ और न ही उनका कोई अधिवक्ता कोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट का केंद्र और राज्य को सख्त आदेश: आपस में चर्चा कर तत्काल उपलब्ध कराएं अधिकतम सहायता

अदालत का कड़ा रुख और टिप्पणी —

“इंदौर हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली की अनुपस्थिति और प्रशासनिक सुस्ती पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। माननीय न्यायाधीश ने केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल और राज्य के महाधिवक्ता कार्यालय को फिर से कड़े निर्देश जारी किए हैं कि दोनों सरकारें (केंद्र व राज्य) चौबीस घंटे के भीतर आपस में उच्च स्तरीय समन्वय और चर्चा करें। कोर्ट ने साफ किया कि इस मासूम की जिंदगी बचाना पूरे सिस्टम की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए तकनीकी अड़चनों को दरकिनार कर अधिक से अधिक वित्तीय सहायता ऑन-द-स्पॉट स्वीकृत की जाए।”

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे विंध्य और मालवा अंचल के लोग सोशल मीडिया पर अनिका की सलामती के लिए मुहिम चला रहे हैं। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय और देश का स्वास्थ्य मंत्रालय इस मासूम ‘लाड़ली’ की जान बचाने के लिए कितनी तेजी से तिजोरी का रास्ता खोलता है।

होम
MP ब्रेकिंग
Join करें
Join करें
मेन्यू