सतना (मझगवां): मध्य प्रदेश के सतना जिले के सरकारी स्वास्थ्य महकमे से नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। जिले के मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के ओपीडी (OPD) काउंटर पर एक नाबालिग छात्र द्वारा मरीजों की सरकारी पर्ची काटने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल (बहुप्रसारित) हो रहा है। आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ मल्टी स्किल कर्मचारी देवदत्त तोमर ने अपनी सरकारी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए अपने नाबालिग बेटे को अपनी जगह शासकीय कार्य के लिए मुख्य काउंटर पर बैठा दिया था। इस घोर लापरवाही के सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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मरीजों के डेटा और सरकारी पैसों के साथ हो रहा था खिलवाड़
अस्पताल के मुख्य ओपीडी काउंटर पर प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों का आना-जाना लगा रहता है। इस संवेदनशील जगह पर हुई इस लापरवाही के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- 9वीं का छात्र संभाल रहा था सरकारी काम: वीडियो में मरीजों की पर्ची काटता दिख रहा लड़का कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं, बल्कि महज नौवीं कक्षा का छात्र बताया जा रहा है। वह कंप्यूटर पर बैठकर धड़ल्ले से एंट्री कर रहा था।
- डेटा की गोपनीयता और रिकॉर्ड पर संकट: ओपीडी पर्ची बनाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसमें आने वाले मरीजों का नाम, उम्र, गंभीर बीमारियां, पता और अन्य गोपनीय मेडिकल डेटा दर्ज किया जाता है। एक नाबालिग के हाथों में यह संवेदनशील रिकॉर्ड सौंपना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
प्रतिदिन आते हैं 300 मरीज, लिया जाता है 10 रुपये शुल्क
मझगवां का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र का एक बड़ा और मुख्य अस्पताल है, जहां की अव्यवस्था अब उजागर हुई है:
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- कैश काउंटर पर था नाबालिग: मझगवां सीएचसी में प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के नियमों के मुताबिक, ओपीडी पर्ची के लिए प्रति मरीज 10 रुपये का सरकारी शुल्क भी नकद लिया जाता है। ऐसे में सरकारी राजस्व (कैश) और रिकॉर्ड की शुद्धता सीधे तौर पर एक बच्चे के भरोसे छोड़ दी गई थी।
- जिम्मेदारी तय करना मुश्किल: स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि कंप्यूटर रिकॉर्ड में किसी प्रकार की बड़ी त्रुटि होती है, दवाओं के पर्चे में नाम गलत दर्ज होता है या सरकारी कैश में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो इसकी आधिकारिक जिम्मेदारी किसकी होगी, यह पूरी तरह अस्पष्ट है।
बाल श्रम और शासकीय सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला
कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण —
“प्रबुद्ध नागरिकों और विधिक सलाहकारों के अनुसार, किसी भी शासकीय संस्थान या संवेदनशील सरकारी कार्यालय में किसी कर्मचारी द्वारा अपने परिवार के किसी नाबालिग सदस्य से कार्य कराना सीधे तौर पर बाल श्रम कानूनों (Child Labor Laws) और मध्य प्रदेश शासकीय सेवा नियमों (Civil Services Conduct Rules) का खुला उल्लंघन है। इस दुस्साहस के लिए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।”
इस वीडियो के सोशल मीडिया पर जमकर प्रसारित होने के बाद सतना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी देवदत्त तोमर को कारण बताओ नोटिस जारी करने और अस्पताल प्रबंधन से इस पूरे वाकये पर स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी की जा रही है।









