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इंदौर में लापरवाही का ‘ब्लास्ट’: 150 फीट ऊंचा उठा नर्मदा पानी का फव्वारा, हाईटेंशन लाइन से टकराई बौछारें; लाखों गैलन पानी बर्बाद, ढहा मकान

इंदौर में लापरवाही का ‘ब्लास्ट’: 150 फीट ऊंचा उठा नर्मदा पानी का फव्वारा, हाईटेंशन लाइन से टकराई बौछारें; लाखों गैलन पानी बर्बाद, ढहा मकान

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The Khabrilal

Published On: May 31, 2026, 12:56 PM IST

Updated On: May 31, 2026, 12:58 PM IST

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इंदौर/महू, मध्य प्रदेश: एक तरफ जहां पूरा इंदौर और मालवा अंचल भीषण गर्मी में पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ लापरवाही और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण रविवार को लाखों गैलन पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो गया। इंदौर-खंडवा रोड स्थित महू के भेरूघाट इलाके में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना की मुख्य पाइपलाइन तेज धमाके के साथ फट गई। पानी का प्रेशर इतना भीषण था कि 150 फीट ऊंचा फव्वारा सीधे ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से जा टकराया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। वहीं इंदौर शहर के श्रीयंत्र नगर में भी खुदाई के दौरान नर्मदा लाइन तोड़ दी गई।

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1. भेरूघाट हादसा: सुबह 7:30 बजे हुआ धमाका, दहशत में आए लोग

भेरूघाट इलाके में रविवार की सुबह किसी जल-तांडव से कम नहीं थी:

  • हाईटेंशन लाइन से टकराया पानी: नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना की मुख्य पाइपलाइन अचानक ब्लास्ट हो गई। 150 फीट ऊपर तक उठे पानी के गुबार सीधे हाईटेंशन बिजली के तारों को छूने लगे। करंट फैलने के डर से तुरंत पूरे इलाके की बिजली सप्लाई बंद कराई गई।
  • कच्चा मकान बहा, सड़कों पर सैलाब: जब तक लोग कुछ समझ पाते, सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। पानी के इस भीषण तेज बहाव की चपेट में आकर पास में बना एक कच्चा मकान पूरी तरह ढह गया। करीब एक घंटे तक बिना रोक-टोक लाखों गैलन पानी यूं ही बहता रहा।

2. श्रीयंत्र नगर (सी-सेक्टर): टेलीकॉम कंपनी की ड्रिल मशीन ने फोड़ दी पाइपलाइन

दूसरी घटना इंदौर शहर के श्रीयंत्र नगर सी-सेक्टर की है, जहाँ एक निजी टेलीकॉम कंपनी की घोर लापरवाही सामने आई है:

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  • बिना सर्वे के खोदी जमीन: शनिवार देर रात टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी केबल बिछाने के लिए ड्रिल मशीन से खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान मशीन ने जमीन के नीचे मौजूद नर्मदा लाइन और गैस पाइपलाइन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
  • सड़कों पर बहा हक का पानी: शनिवार रात तो पता नहीं चला, लेकिन रविवार सुबह जैसे ही सप्लाई चालू हुई, पानी तेज दबाव के साथ सड़क पर बह निकला। आधे घंटे तक पानी बहता रहा, जिससे क्षेत्र के कई घरों में पानी नहीं पहुंच सका और लोग बूंद-बूंद पानी को तरस गए।

जनता का फूटा गुस्सा: “एक तरफ सूखा बोरवेल, ₹1000 का टैंकर; दूसरी तरफ यह बर्बादी”

इन दोनों घटनाओं को लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासी देवेंद्र सिन्हा और अन्य नागरिकों का साफ कहना है कि:

“इलाके के बोरवेल पहले ही सूख चुके हैं। लोग ₹800 से ₹1000 देकर पानी का टैंकर खरीदने को मजबूर हैं। ऐसे में प्राइवेट कंपनियां बिना किसी रूट सर्वे और सरकारी तालमेल के अंधाधुंध खुदाई कर देती हैं। अगर पहले आबकारी या नगर निगम से पाइपलाइनों का नक्शा लिया जाता, तो शहर की जनता का हक इस तरह सड़कों पर बर्बाद नहीं होता।”

घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित विभागों के तकनीकी कर्मचारी मौके पर पहुंचे हैं और युद्ध स्तर पर क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया है।

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