मुंबई में मराठी की ‘अनिवार्यता’ पर बवाल: यूपी-बिहार के ऑटो चालकों में मची भगदड़; हाइवे पर दौड़े सैकड़ों ऑटो, विरोध के बाद सरकार ने 6 महीने टाला फैसल

बड़वानी/मुंबई |महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा बोलना, लिखना और समझना अनिवार्य करने के फैसले ने प्रवासी चालकों में भारी दहशत फैला दी। परमिट और लाइसेंस रद्द होने के डर से अप्रैल महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के हजारों ऑटो चालक मुंबई छोड़कर अपने गृह राज्यों की ओर भागने लगे थे। हालांकि, चौतरफा विरोध और यूनियनों के दबाव के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस नियम को फिलहाल 6 महीने के लिए टाल दिया है, जिसके बाद अब चालकों की दोबारा मुंबई वापसी शुरू हो गई है।

मुख्य बिंदु

  • दहशत का पलायन: नियमों के कड़े अमल के डर से अप्रैल महीने में आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) पर उत्तर की ओर भागते ऑटो की कतारें दिखाई दी थीं।
  • बड़वानी बॉर्डर पर हलचल: बिजासन पुलिस चौकी के अनुसार, रोजाना औसतन 40 से अधिक ऑटो चालक मुंबई छोड़कर वापस लौट रहे थे। करीब 1500 ऑटो चालकों का पलायन दर्ज किया गया।
  • बड़ा डर: चालकों को डर था कि मराठी न आने पर आरटीओ (RTO) उनका लाइसेंस रद्द कर देगा और भविष्य में 15 साल का डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) मांगा जाएगा।
  • फैसला टला: ऑटो यूनियनों के भारी विरोध और 4 मई के आंदोलन की चेतावनी के बाद सरकार ने 27 अप्रैल को इस फैसले पर 6 महीने के लिए रोक लगा दी।

आगरा-मुंबई हाइवे बना पलायन और वापसी का गवाह

मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित बड़वानी के बिजासन में होटल चलाने वाले सचिन जायसवाल और जामली टोल प्लाजा के मैनेजर राकेश मंडलोई ने इस असामान्य आवाजाही की पुष्टि की। नवी मुंबई में 2015 से ऑटो चला रहे शाहरुख (कन्नौज निवासी) ने बताया कि नियम सख्त होने और भाषा सत्यापन अभियान की अफवाहों के चलते वे अनिश्चितता के डर से घर लौट गए थे। लेकिन अब फैसला टलने के बाद पिछले दो दिनों से चालकों की गाड़ियां फिर मुंबई की ओर दौड़ने लगी हैं।

“केवल ऑटो चालकों पर ही यह नियम क्यों?”

मुंबई के ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने इस नियम को पूरी तरह अव्यावहारिक बताया है। धारावी के यूनियन नेता रनोज कुमार ने सवाल उठाया कि:

  1. दोहरा मापदंड: मराठी भाषा का यह कड़ा नियम केवल ऑटो और टैक्सी चलाने वाले गरीबों पर ही क्यों थोपा जा रहा है? कॉर्पोरेट और अन्य सेक्टर्स में काम करने वाले प्रोफेशनल्स पर ऐसी शर्तें क्यों नहीं हैं?
  2. सीमित पलायन: हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मुंबई के करीब 3.5 लाख ऑटो और 5 लाख टैक्सी चालकों की कुल संख्या की तुलना में पलायन करने वालों की संख्या महज 3 से 4 हजार थी, जो अब वापस आ रहे हैं।

यूनियन की पहल: अब ऑनलाइन सीखेंगे मराठी

दूसरी तरफ, सरकार समर्थित यूनियन के महासचिव डीएम गोसावी ने चालकों से न डरने की अपील की है। उन्होंने बताया कि यूनियन ने 1 मई से ऑनलाइन मराठी लर्निंग प्रोग्राम शुरू किया है ताकि प्रवासी चालक आसानी से कामचलाऊ मराठी सीख सकें। साथ ही सरकार से आरटीओ दफ्तरों में ही भाषा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की मांग की गई है।


खबर का सारांश

  • नियम: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना, पढ़ना और समझना अनिवार्य।
  • पलायन का रूट: मुंबई से बड़वानी (MP बॉर्डर) होते हुए UP-Bihar।
  • राहत की खबर: विरोध के बाद सरकार ने नियम के क्रियान्वयन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ाया।
  • ताजा स्थिति: भय का माहौल खत्म, चालकों की मुंबई वापसी शुरू।

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