रीवा में ‘कलेक्टर Vs सरकारी बाबू’: काम की सख्ती पर तिलमिलाए कर्मचारी; कमिश्नर दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर दी ‘अनिश्चितकालीन हड़ताल’ की चेतावनी

रीवा | रीवा जिले में जनता के अटके कामों को गति देने और दफ्तरों में अनुशासन लाने की नए कलेक्टर की मुहिम के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के कड़े तेवरों और काम के दबाव से परेशान जिले भर के सरकारी कर्मचारियों ने एकजुट होकर कमिश्नर कार्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का दो टूक कहना है कि जनहित के पेंडिंग काम हर हाल में समय पर करने होंगे।

मुख्य बिंद

  • दहशत में लेट-लतीफ बाबू: नए कलेक्टर ने दफ्तरों में समय पर आने और सालों से पेंडिंग पड़े फाइलों के निपटारे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
  • सड़क पर उतरे कर्मचारी: रीवा कमिश्नर मुख्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन। मांगें न पूरी होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम।
  • दुर्व्यवहार का आरोप: कर्मचारियों ने शिकायत की है कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ (Zilla Panchayat CEO) अनावश्यक मानसिक दबाव बना रहे हैं और प्रताड़ित कर रहे हैं।
  • कलेक्टर का कड़ा संदेश: “काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो काम साल भर पहले हो जाने चाहिए थे, वे आज भी पेंडिंग क्यों हैं?”

जब लेट आने वालों को कलेक्टर ने गेट पर ही टोक दिया!

रीवा कलेक्टर का पदभार ग्रहण करते ही आईएएस (IAS) नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने साफ कर दिया था कि प्रशासन जनता का सेवक है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पिछले दिनों उन्होंने समय पर दफ्तर न आने वाले कर्मचारियों को मुख्य द्वार पर ही रोककर कड़ी फटकार लगाई थी। सालों से सुस्त ढर्रे पर चल रही सरकारी व्यवस्था में अचानक आए इस बदलाव और काम के ‘प्रेशर’ को कर्मचारी पचा नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण यह विवाद अब कमिश्नर के दरबार तक पहुँच गया है।

कमिश्नर ने दिया आश्वासन, फिलहाल काम पर लौटे कर्मचारी

कमिश्नर कार्यालय के बाहर कर्मचारियों के भारी आक्रोश और नारेबाजी को देखते हुए कमिश्नर ने स्वयं हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रदर्शनकारी कर्मचारी नेताओं से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं और मामले में उचित व निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। कमिश्नर के भरोसे के बाद कर्मचारी फिलहाल अपने-अपने दफ्तरों में काम पर लौट गए हैं, लेकिन गतिरोध अभी भी पूरी तरह थमा नहीं है।


पब्लिक वर्सेज सुस्त सिस्टम: जनता के हक में अड़े कलेक्टर

इस पूरे विवाद पर आम जनता कलेक्टर के इस सख्त कदम की सराहना कर रही है। जिले के समाजसेवियों का कहना है कि रीवा के सरकारी दफ्तरों में बाबूशाही के कारण छोटे-छोटे कामों के लिए लोगों को महीनों चक्कर काटने पड़ते थे। ऐसे में यदि कोई ईमानदार अधिकारी काम में तेजी लाना चाहता है, तो कर्मचारियों को सहयोग करना चाहिए न कि हड़ताल की धमकी देनी चाहिए।


खबर का सारांश

  • पक्ष-1: कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी (अनुशासन और समय पर काम की सख्ती)।
  • पक्ष-2: रीवा जिले के सरकारी कर्मचारी (अनावश्यक दबाव और दुर्व्यवहार का आरोप)।
  • ताजा स्थिति: कमिश्नर के दखल के बाद प्रदर्शन समाप्त, लेकिन हड़ताल की चेतावनी बरकरार।
  • मुख्य मुद्दा: दफ्तरों में लेटलतीफी और फाइलों की पेंडेंसी।

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