IAS के फार्म हाउस पर छापे की ‘सजा’ पर HC का चांटा: हाई कोर्ट ने निरस्त किया जांबाज TI का निलंबन; कहा- ‘ऐसी डराने वाली कार्रवाई से पुलिस का मनोबल टूटेगा’

इंदौर/जबलपुर | मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे के निलंबन और ट्रांसफर ऑर्डर को पूरी तरह से निरस्त करते हुए राज्य सरकार पर बेहद गंभीर और तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि रसूखदारों पर कार्रवाई करने के कारण पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यदि ऐसी प्रतिशोधात्मक और एकतरफा कार्रवाई की जाएगी, तो कोई भी पुलिसकर्मी निष्पक्ष होकर कानून का पालन कराने का साहस नहीं जुटा पाएगा।

मुख्य बिंदु

  • बड़ी राहत: हाई कोर्ट ने अपने 23 पेज के विस्तृत आदेश में टीआई के निलंबन को पक्षपातपूर्ण, असंगत और द्वेषभावना से ग्रसित बताया।
  • आईएएस का रसूख: 10-11 मार्च 2026 की रात मानपुर पुलिस ने एमपी वित्त निगम की प्रबंध संचालक (MD) वंदना वैद्य (IAS) के फार्म हाउस पर दबिश देकर हाई-प्रोफाइल जुआ पकड़ा था।
  • रसूखदार पर छापा पड़ते ही गिरी गाज: कार्रवाई के अगले ही दिन पुलिस विभाग ने टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे और दो सब-इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया और टीआई का मुख्यालय इंदौर से बुरहानपुर बदल दिया गया।
  • कोर्ट में खुली पोल: टीआई पर घटनास्थल (आईएएस का फार्म हाउस) बदलने का दबाव बनाया गया था, जिस पर कोर्ट में सरकारी वकील कोई जवाब नहीं दे पाए।

“घटनास्थल बदलने का बनाया गया था दबाव”, सरकार की खामोशी पड़ी भारी

थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने अपने निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विभाग के आला अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया था कि वे एफआईआर में आईएएस अधिकारी के फार्म हाउस का नाम हटाकर घटनास्थल कहीं और दिखाएं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि— “शासन की ओर से इस गंभीर आरोप पर कोर्ट में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। सरकार की यह चुप्पी स्वतः ही थाना प्रभारी के आरोपों को सच साबित करती है।”

जांबाज पुलिसकर्मी को इनाम के बजाय सजा क्यों?

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने माना कि:

  1. कानूनी प्रक्रिया का पालन: टीआई ने मुखबिर की सूचना पर तत्काल एक्शन लिया, विधिवत तलाशी वारंट हासिल किया, गवाहों को साथ रखा और छापा मारा।
  2. सजा देना गलत: त्वरित, कुशल और कानून सम्मत कार्रवाई करने के लिए किसी जांबाज पुलिस अधिकारी को दंडित करना निष्पक्ष पुलिसिंग और कानून के शासन के बिल्कुल विपरीत है।

एसपी (SP) का हास्यास्पद तर्क कोर्ट ने नकारा

निलंबन के दौरान एसपी ने तर्क दिया था कि “थाना क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर जुआ चलना टीआई की विफलता और संदिग्ध आचरण को दर्शाता है।” कोर्ट ने इस खोखले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब थाना प्रभारी खुद आगे रहकर छापा मार रहे हैं और अपराधियों को पकड़ रहे हैं, तो उसे विफलता या संदिग्ध आचरण कैसे कहा जा सकता है?


क्रोनोलॉजी: छापे से लेकर हाई कोर्ट के फैसले तक

  • 10-11 मार्च 2026: आईएएस वंदना वैद्य के फार्म हाउस पर पुलिस का छापा, जुआ पकड़ाया।
  • 12 मार्च 2026: एक्शन लेने वाले जांबाज टीआई हिहोरे और दो सब-इंस्पेक्टर निलंबित।
  • 18 मार्च 2026: टीआई का मुख्यालय बदलकर इंदौर से बुरहानपुर (दूर) किया गया।
  • 8 मई 2026: हाई कोर्ट ने निलंबन रद्द किया, टीआई की ससम्मान बहाली का रास्ता साफ।

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