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सिंगरौली का ‘वीआईपी’ वार्ड क्रमांक 40 पानी-पानी: महापौर के लकड़ी टाल के सामने सड़क बनी समंदर; पूर्व सांसद रीति पाठक के निवास और जज बंगलों वाले एरिया में नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल

सिंगरौली का ‘वीआईपी’ वार्ड क्रमांक 40 पानी-पानी: महापौर के लकड़ी टाल के सामने सड़क बनी समंदर; पूर्व सांसद रीति पाठक के निवास और जज बंगलों वाले एरिया में नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल

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The Khabrilal

Published On: Jul 8, 2026, 7:54 PM IST

Updated On: Jul 8, 2026, 7:54 PM IST

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सिंगरौली: मानसून की शुरुआती बारिश ने ही सिंगरौली नगर निगम के कागजी दावों और जलनिकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था की विधिक रूप से पोल खोलकर रख दी है। शहर का सबसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील माना जाने वाला वार्ड क्रमांक 40 इस समय घुटने तक भरे पानी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। आलम यह है कि महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल के स्वयं के लकड़ी टाल के ठीक सामने की मुख्य सड़क पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और स्थानीय वीआईपी नागरिकों को आवागमन में भारी विधिक व व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


जहां रहते हैं पूर्व सांसद, जज और मजिस्ट्रेट, उस पॉश इलाके में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ठप

वार्ड क्रमांक 40 की भौगोलिक और प्रशासनिक कड़ियाँ इतनी महत्वपूर्ण हैं कि इसे शहर का दिल कहा जाता है, लेकिन वर्तमान तस्वीरें निगम की विफलता दर्शाती हैं:

  • दिग्गजों के दफ्तर और आवास प्रभावित: इसी वार्ड में पूर्व सांसद रीति पाठक का निजी आवास, जिले के माननीय जज एवं मजिस्ट्रेट के सरकारी बंगले, वर्तमान सांसद डॉ. राजेश मिश्रा का मुख्य कार्यालय तथा पूर्व नगर निगम अध्यक्ष वीरेन्द्र मिश्रा का निवास स्थान स्थित है।
  • पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लॉक: इस जलमग्न मुख्य मार्ग पर ही शासकीय ‘सीएम राइज स्कूल’ (CM Rise School), दर्जनों नामी निजी विद्यालय, विद्युत विभाग के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों के बंगले, जिला न्यायालय परिसर, मुख्य खेल स्टेडियम, जामा मस्जिद, हनुमान मंदिर और घनी आबादी वाला मुख्य बाजार स्थित है। जलभराव के कारण इन सभी प्रमुख केंद्रों की कड़ियाँ आपस में कट गई हैं।

“जब खुद महापौर के इलाके का यह हाल है, तो गरीब बस्तियों का क्या होगा?” — भड़के क्षेत्रवासी

नगर निगम के खिलाफ स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की विधिक व सामाजिक आपत्तियां लगातार तेज होती जा रही हैं:

  1. नहीं हुआ नालों का प्री-मानसून विलेख: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन द्वारा बारिश से पहले बड़े नालों और नालियों की तकनीकी व भौतिक सफाई (Pre-Monsoon Desilting) नहीं कराई गई। हर साल बरसात के मौसम में यह वीआईपी मार्ग तालाब में तब्दील हो जाता है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए कोई विधिक ब्लूप्रिंट तैयार नहीं किया गया।
  2. संवेदनशील वार्डों की उपेक्षा: क्षेत्रवासियों ने तीखा आक्रोश जताते हुए कहा कि जब शहर के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील वार्ड का यह हाल है, जहां से पूरे जिले की न्यायपालिका और कार्यपालिका चलती है, तो नगर निगम के अंतर्गत आने वाले अन्य पिछड़े व ग्रामीण वार्डों की नारकीय स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थायी ड्रेनेज मास्टर प्लान की उठी विधिक मांग; नगर निगम कमिश्नर को अल्टीमेटम की तैयारी

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी जन-आक्रोश की कड़ियाँ —
“वार्ड क्रमांक 40 के रिहायशी संघों और चैंबर ऑफ कॉमर्स ने जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन से विधिक अपील की है कि मुख्य मार्ग पर तत्काल हैवी सक्शन पंप लगाकर जलभराव को दूर किया जाए और भविष्य के लिए एक विस्तृत ड्रेनेज मास्टर प्लान (Drainage Master Plan) तैयार किया जाए.
स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की आगामी भारी बारिश से पहले इस वीआईपी कॉरिडोर की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो क्षेत्र की जनता नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर विधिक व लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने को विवश होगी।”


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