ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के आदेश पर शहर की सड़कों के निर्माण एवं भुगतान की गुणवत्ता जांच के लिए गठित विशेष एडवोकेट कमिश्नर और छह सदस्यीय तकनीकी दल की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। बेटी बचाओ तिराहा से गुढ़ा-गुढ़ी का नाका, हनुमान टॉकीज, श्मशान, गुढ़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक होते हुए पदमा विद्यालय तक बनाई गई सड़क की कोर कटिंग और ऑन-स्पॉट जांच में कागजी दावों और मैदानी हकीकत के बीच भारी अंतर पाया गया है।

1. कागजों पर 80 MM, जांच में निकली आधी डामर की परत
जांच टीम द्वारा लिए गए सैंपलों की लैब और भौतिक जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
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डामर की मोटाई में कटौती: एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक (MB) में सड़क की बिटुमिनस लेयर की मोटाई 80 MM दिखाई गई थी, लेकिन जब मौके पर कोर कटिंग की गई तो यह महज 44 से 45 MM ही पाई गई।
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मलबा दबाकर खानापूर्ति: लोकेशन नंबर-6 पर खुदाई के दौरान WMM (गीली मिश्रित मिट्टी की परत) की जगह नीचे निर्माण का कचरा और मलबा दबा हुआ मिला। डामर की मात्रा, मिट्टी की डेंसिटी और WMM की गुणवत्ता भी मानकों से काफी कम निकली।
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पुराने बेस पर भुगतान: सेकंड बटालियन के सामने सड़क की खुदाई में पतली डामर परत के ठीक नीचे पुरानी सीसी (सीमेंट कंक्रीट) सड़क मिली। आशंका जताई गई है कि पुरानी सड़क पर ही केवल डामर चढ़ाकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया।

2. 1125 की जगह कागजों में दर्ज की 1440 क्यूबिक मीटर WMM
रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं के कई प्रमाण दिए गए हैं:
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फर्जी मात्रा बढ़ाई गई: मूल एस्टीमेट में 1125 क्यूबिक मीटर WMM का प्रावधान था, लेकिन मेजरमेंट बुक में इसे बढ़ाकर 1440.31 क्यूबिक मीटर दर्ज कर दिया गया।
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नोटशीट से बदला टेंडर और बजट: सड़क का मूल टेंडर सिंधी कॉलोनी मार्ग के लिए 2.68 करोड़ रुपए में जारी हुआ था। बाद में बिना कोई नया टेंडर जारी किए केवल विभागीय नोटशीट चलाकर लोकेशन बदलकर ‘गुढ़ा-गुढ़ी का नाका’ कर दी गई और बजट बढ़ाकर 3.01 करोड़ रुपए कर दिया गया।

3. मेजरमेंट बुक गायब, फर्जी लैब रिपोर्ट लगाने का आरोप
PWD नियमों के तहत मेजरमेंट बुक में निर्माण का माप किलोमीटर और चेनेज (Chainage) के हिसाब से होना चाहिए, लेकिन नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में केवल जगहों के नाम दर्ज मिले।
इसके अलावा, नगर निगम की ओर से पेश PWD लैब रिपोर्ट को संबंधित लैब प्रभारी ने स्वयं के संस्थान की रिपोर्ट होने से पूरी तरह इनकार कर दिया, जिससे फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट लगाने का मामला भी उजागर हुआ है।
जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु एक नजर में
| जांच बिंदु | एस्टीमेट / रिकॉर्ड का दावा | मौके पर पाई गई वास्तविक स्थिति |
| डामर (Bituminous Layer) मोटाई | 80 MM | 44 से 45 MM |
| WMM मात्रा | 1125 क्यूबिक मीटर | MB में बढ़ाकर 1440.31 क्यूबिक मीटर दर्ज |
| सड़क का बेस | नया WMM बेस | पुरानी सीसी सड़क और दबा हुआ मलबा |
| प्रोजेक्ट बजट | 2.68 करोड़ (मूल) | नोटशीट से बढ़ाकर 3.01 करोड़ रुपए किया |
हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद मची खलबली
तकनीकी दल की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कम कॉम्पेक्शन और अमानक सामग्री के उपयोग के कारण ही पहली ही बारिश में सड़कें धंस गईं और बदहाल हो गईं। हाईकोर्ट में यह रिपोर्ट जमा होने के बाद नगर निगम, PWD के संबंधित इंजीनियरों, ठेकेदारों और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।










