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कौन हैं कड़क मिजाज IAS नरेंद्र सूर्यवंशी? जिस बस से चले उसे कराया सीज, अब तहसीलदार को फोन पर लपेटा; रीवा में जमाई धाक

कौन हैं कड़क मिजाज IAS नरेंद्र सूर्यवंशी? जिस बस से चले उसे कराया सीज, अब तहसीलदार को फोन पर लपेटा; रीवा में जमाई धाक

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प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 30, 2026, 5:29 PM IST

Updated On: Sep 30, 2026, 5:29 PM IST

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रीवा : रीवा जिले के नवागत कलेक्टर और 2012 बैच के आईएएस अधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अपने कड़क मिजाज, औचक निरीक्षण और त्वरित एक्शन को लेकर प्रदेशभर में सुर्खियों में हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान गुढ़ तहसीलदार को फोन पर फटकार लगाने और आरटीओ कार्यालय में दलालों पर गरजने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
जिस बस में बैठकर आए उसे ही कराया सीज, तहसीलदार को लगाई फटकार
हाल ही में गुढ़ तहसील के पपोता गांव में आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान कार्यक्रम में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी प्रशासनिक अमले के साथ जिस बस में बैठकर पहुंचे थे, उतरते ही उन्होंने तकनीकी खामियों और लापरवाही के चलते उसी बस को सीज करने के आदेश दे दिए। इसी कार्यक्रम में जब एक रोते हुए ग्रामीण ने शिकायत की कि पीएम आवास योजना का मकान पास होने के बावजूद गुढ़ तहसीलदार ने स्टे लगा दिया है, तो कलेक्टर ने मौके से ही तहसीलदार अरुण यादव को फोन लगाकर खरी-खोटी सुना दी। वायरल वीडियो में वे कहते दिखे— “ज्यादा उड़ रहे हो, शर्म करो… तुम्हारे नाम से यहां लोग रो रहे हैं।”
आरटीओ दफ्तर में औचक निरीक्षण, दलालों को दी सख्त चेतावनी
इससे पहले रीवा आरटीओ कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान भी कलेक्टर का सख्त रुख देखने को मिला था। दलालों द्वारा आम नागरिकों से अवैध वसूली की शिकायत पर उन्होंने मौके पर मौजूद दलालों को सीधे चेतावनी देते हुए कहा था— “कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी चेताया कि परिसर में दलाली पाई गई तो सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस तक का सफर
मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवासी और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर आईएएस नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी राज्य सिविल सेवा (State Civil Services) से पदोन्नत होकर 2012 में आईएएस बने हैं। रीवा से पहले वे रतलाम और निवाड़ी जिलों में कलेक्टर के रूप में अपनी सफल सेवाएं दे चुके हैं। मैदानी पकड़ और कड़े प्रशासनिक फैसलों के कारण उनकी गिनती विंध्य और पूरे मध्य प्रदेश के सबसे तेज-तर्रार अफसरों में होती है।
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