सतना के सार्थक हॉस्पिटल में नवजात की मौत पर भारी बवाल, भड़के परिजनों ने पन्ना हाईवे पर लगाया जाम: एक्सपायर्ड दवा चढ़ाने का आरोप; केस शीट में ‘मेल’ को लिखा ‘फीमेल’, 1 दिन के बच्चे को बताया 1 महीने का

सतना: मध्य प्रदेश के सतना (Satna) शहर के पन्ना रोड स्थित ‘सार्थक हॉस्पिटल’ में चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की मौत के बाद सोमवार को पीड़ित परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने डॉक्टरों पर एक्सपायर्ड (अमानक तिथि) दवाइयां चढ़ाने और केस शीट में गंभीर विधिक त्रुटियां करने के संगीन आरोप लगाए हैं। न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने अस्पताल के सामने पुराने सतना-पन्ना हाईवे पर धरना देकर चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब 20 मिनट तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।

चित्रकूट हॉस्पिटल में हुआ था जन्म; २४ घंटे के भीतर किडनी खराब होने का दिया हवाला

सार्थक हॉस्पिटल में नवजात की मौत से जुड़ी प्रशासनिक और विधिक कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • १० जुलाई को हुआ था जन्म: टिकुरिया टोला निवासी पीड़ित पिता नवीन गुप्ता ने बताया कि उनकी पत्नी नीलम गुप्ता ने 10 जुलाई को बस स्टैंड के पास स्थित चित्रकूट हॉस्पिटल में एक बेटे (मेल बेबी) को जन्म दिया था। इसके बाद शिशु की सिकाई और आगे के रूटीन उपचार के लिए 11 जुलाई को उसे सार्थक हॉस्पिटल के शिशु वार्ड में विधिक रूप से भर्ती कराया गया था।
  • २५ हजार के इंजेक्शन का खेल: परिजनों का आरोप है कि भर्ती के अगले ही दिन डॉक्टरों ने अचानक कड़ियाँ बदलते हुए कहा कि नवजात की किडनी में गंभीर समस्या है और उसे ठीक करने के लिए 25 हजार रुपये का एक विशेष इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। सोमवार को जब इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।

पर्ची में जेंडर और उम्र का बड़ा खेल; मेडिकल स्टोर से पकड़ी गईं एक्सपायर्ड औषधियां

अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करने वाले विलेख साक्ष्य इस प्रकार सामने आए:

  1. कागजी विलेखों में भारी लापरवाही: पीड़ित परिवार ने जब अस्पताल की आधिकारिक पर्ची देखी, तो उसमें नवजात के जेंडर (लिंग) में ‘मेल’ की जगह ‘फीमेल’ दर्ज था। यही नहीं, महज 24 घंटे (एक दिन) के बच्चे की उम्र कागजों पर ‘एक महीना’ लिखी हुई थी। यह विलेख दर्शाता है कि बिना विधिक मुस्तैदी और ध्यान दिए ही बच्चे का इलाज किया जा रहा था।
  2. थाने पहुंचे एक्सपायर्ड दवाओं के विलेख: हंगामे के दौरान परिजनों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अस्पताल के आंतरिक मेडिकल स्टोर से हटाई जा रही कई कथित एक्सपायरी दवाइयां रंगे हाथों पकड़ लीं। इन दवाओं को साक्ष्य के तौर पर लेकर परिजन सिविल लाइन थाने पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की तहरीर दी।

सीएसपी देवेंद्र प्रताप सिंह ने खुलवाया जाम; आज जिला अस्पताल में होगा पोस्टमार्टम

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —

“हाइवे जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही सीएसपी (CSP) देवेंद्र प्रताप सिंह चौहान भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने आक्रोशित परिजनों को ढाढस बंधाया और आश्वस्त किया कि मामले की विधिक और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, जिसके बाद २० मिनट से बाधित यातायात बहाल हो सका.

सिविल लाइन पुलिस ने मर्ग डायरी तैयार कर ली है और बच्चे के उपचार से जुड़े सभी विलेखों को जब्त कर लिया है। मंगलवार को जिला अस्पताल के डॉक्टरों के पैनल द्वारा नवजात का विधिक पोस्टमार्टम (PM) कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की विधिक जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।”

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