सतना सीवर लाइन प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला, अफसरों की मिलीभगत से ठेकेदार ने बचाए लाखों रुपये; एग्रीमेंट की धज्जियां उड़ाकर की अमानक बैकफिलिंग, अब धसक रहीं स्मार्ट सिटी की सीसी सड़कें

सतना: मध्य प्रदेश के सतना (Satna) शहर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। पहले सीवर की बेतरतीब खुदाई से परेशान शहरवासी अब टूटते और धसकते रेस्टोरेशन (सड़क मरम्मत) से आजिज आ चुके हैं। नगर निगम के अधिकारियों और ठेका कंपनी ‘एनविराड’ (Enviroad) की कथित मिलीभगत से सीवर ट्रेंच (गड्ढों) की बैकफिलिंग में बड़े पैमाने पर विधिक मापदंडों की अनदेखी की गई है। एग्रीमेंट के विपरीत बिना लेयर बनाए और बिना कॉम्पैक्शन किए सीधे मशीनों से मिट्टी पाट दी गई। नतीजा यह है कि अब पहली ही बारिश में मिट्टी बैठ रही है और उसके ऊपर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाई गई चमचमाती सीसी (Cement Concrete) सड़कें धसक कर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो रही हैं।

एग्रीमेंट के पेज 94 पर दर्ज नियमों को ताक पर रखा; ढाई सौ मीटर की जगह कई किमी खोदा

सतना सीवर प्रोजेक्ट के विलेखों और जमीनी हकीकत से जुड़ी मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • लागत बचाने के लिए नियमों की बलि: नगर निगम और ठेका कंपनी एनविराड के बीच हुए अनुबंध के पेज नंबर 94 (क्लाज नंबर 2) के तहत बैकफिलिंग को तीन जोन (A, B, C) में बांटकर हर 15 सेंटीमीटर की परत (लेयर) में मिट्टी भरकर अर्थ कॉम्पैक्टर से दबाना था। पानी डालकर 90 फीसदी एमडीडी डेंसिटी जांचना अनिवार्य था। लेकिन ठेकेदार ने लेयर बनाने, पानी डालने और कॉम्पैक्टर चलाने का खर्च बचाने के लिए सीधे मशीन से मिट्टी डाल दी।
  • चेंबर चुनाव का दबाव और अंधी गति: नियमानुसार एक बार में 250 मीटर से अधिक खुदाई नहीं करनी थी, लेकिन ठेकेदार ने कई किलोमीटर तक सड़कें खोद डालीं। बाद में चेंबर ऑफ कॉमर्स के चुनावों को देखते हुए व्यापारियों के आंदोलन के दबाव में आकर प्रतिकूल स्थिति में ही रेस्टोरेशन का काम करा दिया गया।

स्मार्ट सिटी विंग की चेतावनी को किया नजरअंदाज; सब इंजीनियर पल्ला झाड़ते नजर आए

इस अमानक निर्माण कार्य को लेकर तकनीकी विंग और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं:

  1. स्मार्ट सिटी ने लिखकर चेताया था: सीसी रोड का निर्माण करने वाली स्मार्ट सिटी योजना के तकनीकी अमले ने कलेक्ट्रेट और निगम प्रशासन को लिखित विलेख देकर सचेत किया था कि मिट्टी मापदंडों के अनुसार नहीं भरी गई है, इसलिए इसे सेटल होने के लिए समय चाहिए। यदि जल्दबाजी में रोलर चलाया गया तो रेस्टोरेशन धसक जाएगा। लेकिन निगम के सहायक यंत्री ने इस विधिक चेतावनी को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
  2. जिम्मेदारों की कड़ियाँ टूटीं: जब इस घोटाले को लेकर संबंधित उपयंत्रियों (Sub Engineers) से बात की गई, तो वे जवाब देने से बचते नजर आए। प्रभारी उपयंत्री हर्षिता बैरागी ने इस काम से खुद को पूरी तरह अलग बताया, जबकि सरकारी विलेख आदेश में नवंबर 2024 से जोन 2 और 3 की जिम्मेदारी उनके पास थी। वहीं दूसरे उपयंत्री अतुल सिंह नियमों के तहत काम होने का दावा कर फोन काटने लगे।

ये हैं सतना की जनता को गड्ढों में धकेलने वाले मुख्य दोषी

स्थानीय नागरिकों और विलेखों के आधार पर इस घोटाले की कड़ियाँ इन पांच स्तरों पर जुड़ी हैं:

  • ठेका कंपनी एनविराड: जिसने मुनाफे के चक्कर में एग्रीमेंट के तकनीकी मापदंडों का खुला उल्लंघन किया।
  • निगम की तकनीकी विंग: प्रभारी उपयंत्री हर्षिता बैरागी, अतुल सिंह, रविराज सिंह और सहायक यंत्री केपी गुप्ता, जिनका विधिक दायित्व डेंसिटी रिपोर्ट जांचना और औचक निरीक्षण करना था।
  • प्रशासनिक विंग: निगमायुक्त और महापौर, जिनकी निगरानी ढीली होने से अधिकारियों की मनमानी चलती रही।

अधिकारियों के दावों को स्थानीय निवासियों ने बताया पूरी तरह झूठा

प्रशासनिक मुस्तैदी और जमीनी हकीकत की कड़ियाँ —

“हमने सीवर ट्रंच की बैक फिलिंग की अमानक स्थितियों से नगर निगम के अधिकारियों को विधिक रूप से सचेत किया था और वक्त मांगा था. लेकिन काम पूरा करने के लिए लगातार प्रशासनिक दबाव बनाया गया।” – अजय गुप्ता, सहायक यंत्री, स्मार्ट सिटी

“खुदाई के बाद बैक फिलिंग के नाम पर सीधे मशीन से मिट्टी डाल दी गई है. न परत बनाई गई, न पानी डाला गया, न कॉम्पैक्टर चलाया गया. यह पूरा काम मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है। अगर अधिकारी कह रहे हैं कि नियमों में काम हुआ है तो वे सरासर गलत बता रहे हैं।” – राकेश अग्रवाल, स्थानीय निवासी

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