रामनगर मैहर जिले के रामनगर जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुहौला में विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पंचायत में कराए जा रहे पुलिया निर्माण, सड़क निर्माण और आंगनबाड़ी भवन के कार्यों में तकनीकी प्रावधानों और स्वीकृत एस्टीमेट की अनदेखी की जा रही है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव अवधेश सिंह (पटेल) और ठेकेदार राजाराम पटेल की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है।

1. पुल निर्माण: नींव और विंगवॉल के मानकों से समझौते का आरोप
ग्राम पंचायत में कराए जा रहे पुल निर्माण की मौके की स्थिति पर तकनीकी सवाल उठ रहे हैं:
-
कमजोर बेस और नींव: तकनीकी प्रावधानों के तहत पर्याप्त खुदाई और मजबूत कंक्रीट बेस बनाने के बजाय नाममात्र की खुदाई कर सीधे ढोला रखकर निर्माण आगे बढ़ाने का आरोप है।
-
विंगवॉल की मोटाई में कमी: निर्धारित ड्राइंग के अनुसार विंगवॉल (पंखी) की ऊपरी मोटाई 45 से 50 सेंटीमीटर होनी चाहिए, लेकिन मौके पर इसकी चौड़ाई व मोटाई कम बताई जा रही है।
-
अमानक सामग्री का उपयोग: आरोप हैं कि पुलिया के आंतरिक निर्माण में खराब गुणवत्ता की ईंटों और पर्याप्त सीमेंट-मसाले के बिना काम निपटाया जा रहा है।

2. सड़क निर्माण: 20 MM की जगह 10-12 MM गिट्टी, 2 महीने में उखड़ी परत
सुहौला में स्कूल के पास और मौहासा पहाड़ से पहले बनाई गई कंक्रीट सड़कों की स्थिति 1-2 महीनों में ही जर्जर होने लगी है:
-
अमानक गिट्टी व अनुपात: निर्धारित 1:2:4 अनुपात और 20 MM गिट्टी के स्थान पर 10 और 12 MM गिट्टी का उपयोग करने की बात सामने आई है।
-
कम मोटाई व ज्वाइंट्स की कमी: स्वीकृत 20 सेंटीमीटर मोटाई की तुलना में सड़क की मोटाई केवल 15 से 18 सेंटीमीटर ही पाई जा रही है। इसके अलावा हर 3 मीटर पर दिए जाने वाले एक्सपेंशन ज्वाइंट्स और वाइब्रेटर का उपयोग भी नहीं किया गया।
-
समतलीकरण की अनदेखी: मुरूम बेस और सही समतलीकरण (लेवलिंग) किए बिना ही कंक्रीट ढाल दी गई, जिससे ऊपरी परत उखड़ने लगी है।

3. आंगनबाड़ी भवन की छत से टपक रहा पानी, सचिव के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में पूर्व में बने आंगनबाड़ी केंद्र में शासकीय राशि खर्च होने के बाद भी पहली ही बारिश में छत टपकने की शिकायतें सामने आई हैं।
इसके साथ ही, ग्राम पंचायत सचिव अवधेश सिंह के पूर्व में चार बार निलंबित होने की चर्चाएं भी क्षेत्र में जोरों पर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक रसूख के कारण प्रशासनिक अधिकारी मामलों की निष्पक्ष जांच से बच रहे हैं।

प्रमुख शिकायतें और तकनीकी बिंदु
| निर्माण कार्य | स्वीकृत मानक / प्रावधान | मौके पर कथित स्थिति |
| पुल की विंगवॉल मोटाई | 45 से 50 सेंटीमीटर | निर्धारित मानक से काफी कम |
| पुल का कंक्रीट बेस | पर्याप्त खुदाई + मजबूत कंक्रीट | कम खुदाई कर सीधे ढोला रखना |
| सड़क गिट्टी का साइज | 20 MM गिट्टी | 10 से 12 MM गिट्टी |
| सड़क की मोटाई | 20 सेंटीमीटर | 15 से 18 सेंटीमीटर |
| आंगनबाड़ी भवन | गुणवत्तापूर्ण निर्माण | छत टपकने की शिकायत |
तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन व जनपद पंचायत रामनगर के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि:
-
मौके पर पहुंचकर एस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति (TS), प्रशासनिक स्वीकृति (AS) और मेजरमेंट बुक (MB) का मिलान किया जाए।
-
कोर कटिंग और लैब टेस्ट के जरिए सड़क व पुलिया की वास्तविक मजबूती एवं कंक्रीट मिक्स की जांच कराई जाए।
-
दोषी पाए जाने पर संबंधित सचिव और ठेकेदार के खिलाफ गबन एवं वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया जाए।










