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मऊगंज के नईगढ़ी जनपद पंचायत में भारी घमासान! सामान्य सभा की बैठक रद्द होने पर भड़के सदस्य नृपेंद्र सिंह पिंटू; अध्यक्ष पर लगाए तानाशाही और भेदभाव के आरोप

मऊगंज के नईगढ़ी जनपद पंचायत में भारी घमासान! सामान्य सभा की बैठक रद्द होने पर भड़के सदस्य नृपेंद्र सिंह पिंटू; अध्यक्ष पर लगाए तानाशाही और भेदभाव के आरोप

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The Khabrilal

Published On: Jun 30, 2026, 8:52 PM IST

Updated On: Jun 30, 2026, 8:52 PM IST

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मऊगंज/नईगढ़ी: मऊगंज जिले की जनपद पंचायत नईगढ़ी की प्रशासनिक सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया, जब ऐन वक्त पर जनपद की महत्वपूर्ण सामान्य सभा की बैठक को विधिक कारणों के बिना ही निरस्त कर दिया गया. इस फैसले से आक्रोशित जनपद सदस्य एवं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष नृपेन्द्र सिंह पिंटू ने एक तीखी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनपद अध्यक्ष की कार्यशैली को विधिक व प्रशासनिक रूप से कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने अध्यक्ष पर तानाशाही रवैया अपनाने, विकास कार्यों की विधिक राशि रोकने और चुनिंदा पंचायतों को लाभ पहुंचाने के बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं.

12 बजे होनी थी बैठक, 11 बजे मिला निरस्तीकरण का नोटिस; दफ्तर से गायब मिले अफसर

जनपद सदस्य नृपेंद्र सिंह पिंटू द्वारा जारी विधिक बयान के अनुसार, पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक विफलता की कहानी बयां करता है:

  • अचानक स्थगन: तय कार्यक्रम के अनुसार 29 जून को दोपहर 12 बजे जनपद पंचायत की सामान्य सभा की विधिक बैठक आहूत की गई थी. लेकिन जनप्रतिनिधियों को झटका तब लगा जब बैठक शुरू होने के महज एक घंटे पहले सुबह 11 बजे बिना किसी ठोस विधिक आधार के इसे अचानक रद्द कर दिया गया.
  • अध्यक्ष-सीईओ नदारद: पिंटू ने बताया कि जब वे और अन्य जनप्रतिनिधि तय समय पर जनपद कार्यालय पहुंचे, तो वहां न तो जनपद अध्यक्ष मौजूद थीं और न ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) अपनी विधिक कुर्सी पर मुस्तैद थे. दफ्तर में केवल कुछ परेशान जनपद सदस्य ही आपस में चर्चा करते नजर आए.

4 सालों से ठप पड़ी हैं विधिक समितियां; पिछले दो वित्तीय वर्ष का बजट अधर में

विज्ञप्ति के जरिए नईगढ़ी जनपद के भीतर चल रही प्रशासनिक और वित्तीय विसंगतियों को विधिक रूप से रेखांकित किया गया है:

  1. आवाज दबाने की कोशिश: नृपेंद्र सिंह पिंटू ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से जनपद की विधिक कार्यप्रणाली तानाशाही के ढर्रे पर चल रही है. समय पर न तो सामान्य सभा बुलाई जाती है और ना ही अन्य महत्वपूर्ण विधिक समितियों की बैठकें नियमित होती हैं, जिससे सदस्यों को अपने क्षेत्र की बुनियादी जनसमस्याएं सदन में रखने का विधिक अवसर ही नहीं मिल पाता.
  2. राशि आवंटन में घोर पक्षपात: उन्होंने आरोप मढ़ा कि जनपद की 15वें वित्त व अन्य विकास राशि का वितरण विधिक और निष्पक्ष तरीके से नहीं किया जा रहा है. कुछ चुनिंदा ग्राम पंचायतों और चहेते ठेकों को ही वित्तीय प्राथमिकता दी जा रही है. यही वजह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की संयुक्त कार्ययोजना तथा विधिक राशि का वितरण अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे ग्रामीण अंचलों का विकास पूरी तरह ठप है.

फेसबुकिया आरोपों से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता, हिम्मत है तो कराएं विधिक जांच— पिंटू

भ्रष्टाचार के आरोपों पर पलटवार और जनता की विधिक परेशानी —

“जनपद अध्यक्ष द्वारा पूर्व में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर तीखी विधिक प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र सिंह पिंटू ने कहा कि केवल सोशल मीडिया और फेसबुक पर अनर्गल आरोप लगाने से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होता. यदि अध्यक्ष वास्तव में ईमानदार हैं, तो उन्हें फाइलों की विधिक व उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए. उन्होंने सवाल दागा कि पिछले 4 वर्षों के कार्यकाल में अध्यक्ष ने कितनी दोषी ग्राम पंचायतों की विधिक जांच कराई और कितनी वित्तीय रिकवरी सरकारी खजाने में जमा करवाई?

उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अध्यक्ष की प्रशासनिक अक्षमता और विधिक सूझबूझ की कमी के कारण आज पूरी नईगढ़ी जनपद क्षेत्र की सम्मानित जनता, पंच, सरपंच और निर्वाचित जनपद सदस्य विधिक रूप से प्रताड़ित और परेशान हैं. सदस्यों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और मऊगंज कलेक्टर इस पूरे मामले में विधिक दखल दें और जनपद की सामान्य सभा की बैठक को वरिष्ठ अधिकारियों की विधिक मॉनिटरिंग में दोबारा तत्काल आयोजित कराएं.”

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