मैहर: विंध्य अंचल के मैहर जिले के भदनपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम बहिली में स्थापित जनजातीय अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को वन विभाग के अमले द्वारा उखाड़े जाने के बाद समूचा आदिवासी समाज विधिक रूप से उद्वेलित हो उठा। गुरुवार को इस एकतरफा कार्रवाई के विरोध में हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने पहले कलेक्ट्रेट में विधिक ज्ञापन सौंपा और फिर वन मंडल कार्यालय का घेराव कर मैहर की मुख्य सड़क पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान क्षेत्र के दौर पर निकले सांसद गणेश सिंह का काफिला भी प्रदर्शनकारियों के विधिक आक्रोश के बीच फंस गया, जिन्हें ग्रामीणों ने बीच सड़क पर रोककर शासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर विधिक नारेबाजी की।

आपसी चंदे से स्थापित की थी मर्यादा, बिना नोटिस मूर्ति उखाड़कर दो ग्रामीणों को ले गई थी वन टीम
विवाद की पृष्ठभूमि और आदिवासियों के विधिक अधिकारों से जुड़ी कड़ियां इस प्रकार हैं:
- भूमि आवंटन की थी विधिक मांग: आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने बीती 25 जून को डिप्टी कलेक्टर और डीएफओ (DFO) को एक लिखित विधिक आवेदन देकर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापना और आगामी जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन के लिए 2 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने का विधिक आग्रह किया था।
- अचानक हुई कार्रवाई: इसके बाद 27 जून को ग्रामीणों ने आपसी जनसहयोग से चंदा जुटाकर वन भूमि के एक हिस्से में प्रतिमा स्थापित की। ग्रामीणों का दावा है कि तब वनकर्मियों ने निरीक्षण कर कोई विधिक आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन गुरुवार सुबह बिना किसी पूर्व सूचना या विधिक नोटिस के टीम ने अचानक धावा बोलकर मूर्ति को उखाड़ दिया। इसके साथ ही विरोध कर रहे दो स्थानीय ग्रामीणों—सूखदाम कोल और रामनाथ कोल को भी वन अमला विधिक हिरासत में लेकर अपने साथ मैहर दफ्तर ले आया, जिससे आक्रोश की आग भड़क गई।
बीच सड़क पर बैठे ग्रामीण; टीआई अनिमेष द्विवेदी और पुलिस बल ने संभाली विधिक कमान
वन विभाग की मनमानी के खिलाफ जब दफ्तर के भीतर कोई विधिक सुनवाई नहीं हुई, तो नाराज ग्रामीण और मातृशक्ति मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया:
- प्रशासनिक मुस्तैदी: हंगामे की विधिक संवेदनशीलता को देखते हुए ताला थाना और मैहर के टीआई अनिमेष द्विवेदी व चौकी प्रभारी रंजीत सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कानून व्यवस्था संभालने के लिए ग्रामीणों से विधिक संवाद शुरू किया।
- सांसद और विधायक की एंट्री: इसी बीच वहां से गुजर रहे क्षेत्रीय सांसद गणेश सिंह की गाड़ी को प्रदर्शनकारियों ने विधिक रूप से घेर लिया। कुछ ही देर में स्थानीय मैहर विधायक भी मौके पर पहुंच गए और ग्रामीणों की विधिक व सामाजिक भावनाओं को सही ठहराया।
सांसद की डीएफओ को कड़ी विधिक फटकार; सम्मानपूर्वक वापस हुई मूर्ति, हिरासत में लिए लोग रिहा
प्रशासनिक समझाइश और मामले का विधिक पटाक्षेप —
“मामले की गंभीरता और आदिवासियों के भारी आक्रोश को देखते हुए सांसद गणेश सिंह ने तत्काल मौके से ही वन मंडलाधिकारी (DFO) विद्याभूषण मिश्रा से फोन पर विधिक लहजे में कड़ी चर्चा की। सांसद ने वन विभाग को दोटूक शब्दों में निर्देशित किया कि भगवान बिरसा मुंडा की हटाई गई प्रतिमा को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ ग्रामीणों को वापस सौंपा जाए और हिरासत में लिए गए दोनों कोल समाज के युवकों को तत्काल विधिक रूप से रिहा किया जाए।
सांसद के इस कड़े विधिक हस्तक्षेप के बाद वन विभाग बैकफुट पर आया; दोनों ग्रामीणों को तुरंत छोड़ा गया और मूर्ति भी ग्रामीणों को आदरपूर्वक सुपुर्द कर दी गई। इसके बाद प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि भूमि आवंटन के विधिक प्रस्ताव पर शासन स्तर से सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा, जिसके बाद ग्रामीणों ने विधिक रूप से चक्काजाम समाप्त किया।”







