भोपाल/छिंदवाड़ा : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, देश के पूर्व वाणिज्य व उद्योग मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने अपने सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभवों को साझा करते हुए देश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को लेकर एक बेहद दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। अपने विशेष लेख में कमलनाथ ने स्पष्ट किया कि भारत के विकास की असली कहानी केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों युवाओं के सपनों की उड़ान है जिन्हें सही समय पर सही दिशा और रोजगार के अवसर मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि उद्योग केवल बड़े-बड़े कारखानों को खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन और समाज के अंतिम व्यक्ति के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा विधिक माध्यम है।

पूर्व पीएम राजीव गांधी के आधुनिक भारत का सपना; महानगरों से निकलकर गांवों तक पहुंचे विकास की रोशनी
कमलनाथ ने अपने लेख में आधुनिक भारत के निर्माण और औद्योगिक विकेंद्रीकरण की कड़ियों को सिलसिलेवार ढंग से साझा किया है:
- राजीव गांधी के विजन को आगे बढ़ाया: कमलनाथ ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने जिस आधुनिक भारत की नींव रखी थी, वह केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य विज्ञान, तकनीक, उद्योग और नवाचार (Innovation) के क्षेत्र में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाना था, जिसका सहभागी बनने का गौरव उन्हें मिला।
- महानगरों के एकाधिकार को चुनौती: उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि केंद्र में उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय संभालने के दौरान उनका दृढ़ विश्वास था कि औद्योगिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, सूरत या गुरुग्राम जैसे महानगरों की बपौती नहीं रहना चाहिए। उद्योगों का विस्तार देश के हर राज्य, हर जिले और छोटे अंचल तक होना चाहिए ताकि स्थानीय युवाओं को पलायन न करना पड़े।
छिंदवाड़ा के स्किल सेंटर्स से बदला युवाओं का भाग्य; विकास पर राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठने की वकालत
लेख में उन्होंने अपने गृह क्षेत्र छिंदवाड़ा में किए गए जमीनी प्रयोगों और राजनीतिक परिपक्वता को लेकर भी अपनी बात रखी है:
- बिना ट्रेनिंग नहीं मिलता रोजगार: कमलनाथ ने अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करते हुए लिखा कि बिना समुचित प्रशिक्षण के आज के दौर में रोजगार मिलना नामुमकिन है. इसी सोच के साथ उन्होंने छिंदवाड़ा में कई विश्वस्तरीय स्किल सेंटर्स (कौशल विकास केंद्र) की स्थापना कराई, जहाँ से प्रशिक्षित होकर आज हजारों बच्चे देश और दुनिया के कोने-कोने में सम्मानजनक नौकरियों के साथ अपने विधिक करियर को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं.
- सुशासन और परिपक्व लोकतंत्र की पहचान: उन्होंने राजनीतिक दलों और वर्तमान सरकारों को एक बड़ा संदेश देते हुए लिखा कि विकास किसी एक व्यक्ति या किसी एक सरकार की निजी संपत्ति नहीं होता. यदि किसी पूर्ववर्ती सरकार ने जनता के हित में कोई अच्छी योजना शुरू की है, तो राजनीतिक द्वेष के कारण उसे रोकना नहीं चाहिए, बल्कि उसे और आगे बढ़ाना चाहिए. यही सुशासन का असली मंत्र है.
लघु-कुटीर उद्योग भारत की असली रीढ़; सत्ता नहीं, स्थायी सामाजिक परिवर्तन ही सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र
मध्य प्रदेश से भावनात्मक रिश्ता और आर्थिक आत्मनिर्भरता का संकल्प —
“पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को असीम संभावनाओं का गढ़ बताते हुए कहा कि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन, भौगोलिक स्थिति और मेहनतकश युवाओं की बदौलत यह प्रदेश देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनने की पूरी क्षमता रखता है. उनका मानना है कि जब तक निजी निवेश और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों (MSME) को खुलकर बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब तक धरातल पर बड़ा आर्थिक परिवर्तन संभव नहीं है.
कमलनाथ ने अपने राजनीतिक जीवन का निचोड़ साझा करते हुए कहा कि राजनीति का अंतिम उद्देश्य केवल सत्ता की कुर्सी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए. यदि उनके प्रयासों से विंध्य, बुंदेलखंड या महाकौशल के किसी भी परिवार की आय बढ़ी है या किसी युवा को रोजगार मिला है, तो वे इसे ही अपने सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी विधिक और वास्तविक उपलब्धि मानते हैं.”







