इंदौर/धार, मध्य प्रदेश: राम मंदिर के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश की न्यायपालिका से एक और बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर शुक्रवार को अपना अंतिम निर्णय सुना दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना है कि पूरा भोजशाला परिसर एक हिंदू मंदिर स्थल है। इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष और याचिकाकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।

2100 पन्नों की एएसआई रिपोर्ट बनी फैसले का आधार
इस मामले में हिंदू पक्ष के प्रमुख अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट रूम से बाहर आकर मीडिया को फैसले की बारीकियों से अवगत कराया:
- चार साल की कानूनी लड़ाई: साल 2022 में इंदौर हाईकोर्ट में दायर की गई इस याचिका पर चार साल तक कड़ी कानूनी बहस चली।
- ASI का वैज्ञानिक सर्वे: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपे गए 2,100 पन्नों की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि इस परिसर का मूल चरित्र पूरी तरह से एक हिंदू मंदिर का है, जो ऐतिहासिक रूप से संस्कृत शिक्षा का एक बड़ा केंद्र (विद्या की काशी) रहा है।
हाईकोर्ट के फैसले की 4 सबसे बड़ी बातें
- 2003 का आदेश निरस्त, नमाज पर रोक: एएसआई (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट ने पूरी तरह से खारिज (निरस्त) कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार वहां नमाज अदा करने की अनुमति मिली हुई थी। अब वहां नमाज नहीं होगी, बल्कि नियमित रूप से पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की जाएगी।
- ब्रिटिश म्यूजियम से वापस आएगी वाग्देवी की मूर्ति: हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में रखी मां सरस्वती (मां वाग्देवी) की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के कानूनी उपायों पर गंभीरता से विचार करे।
- मुस्लिम पक्ष के लिए नई जमीन का विकल्प: कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा है कि यदि वे मस्जिद के लिए कोई वैकल्पिक जगह चाहते हैं, तो वे सरकार को आवेदन दे सकते हैं। सरकार उस आवेदन पर जमीन देने के लिए विचार करेगी।
- जैन समाज की याचिका खारिज: इस मामले में जैन समाज द्वारा लगाई गई हस्तक्षेप याचिका को भी माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
“भोजशाला में फिर स्थापित होगी मां वाग्देवी की मूर्ति”
याचिकाकर्ताओं और हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है। अब वह दिन दूर नहीं जब मां वाग्देवी की वैभवशाली प्रतिमा एक बार फिर भोजशाला के गर्भगृह में पूरी गरिमा के साथ स्थापित होगी और वहां शंखनाद गूंजेगा।




