इंदौर, मध्य प्रदेश: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर व्यापारियों से रंगदारी वसूलने वाले नेटवर्क के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस गैंग के ‘तकनीकी मास्टरमाइंड’ को दबोच लिया है। यह आरोपी शातिर तरीके से गैंग को ऐसे वर्चुअल नंबर उपलब्ध कराता था, जिनसे कॉल करने पर विदेशी कोड दिखाई देते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।

कौन है गैंग का यह ‘तकनीकी मास्टरमाइंड’?
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान रोहित बर्रा उर्फ नाना के रूप में हुई है, जो उज्जैन जिले के महिदपुर का रहने वाला है।
- वर्चुअल नंबरों का खेल: रोहित गैंग के मुख्य सदस्यों (कुलदीप चौहान और सचिन शर्मा) को हाईटेक वर्चुअल नंबर तैयार करके देता था।
- विदेशी कोड का खौफ: इन नंबरों के जरिए जब कॉल किया जाता था, तो व्यापारियों के मोबाइल पर विदेशी देशों के कोड फ्लैश होते थे। इसका मकसद व्यापारियों में खौफ पैदा करना और पुलिस की सर्विलांस टीम को भ्रमित करना था।
इंदौर के व्यापारियों को दी गई थी धमकी
पिछले कुछ दिनों से इंदौर के कई प्रतिष्ठित कारोबारियों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी भरे कॉल आ रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त के निर्देश पर SIT गठित की गई थी।
- कैसे खुला राज: पुलिस ने पहले इस गैंग के सदस्य राजपाल चंद्रावत को गिरफ्तार किया था। राजपाल से हुई कड़ी पूछताछ में सचिन शर्मा का नाम सामने आया और फिर तकनीकी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस सीधे ‘तकनीकी गुरु’ रोहित बर्रा तक पहुँच गई।
- पुख्ता सबूत: पुलिस को ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं जिनसे यह साबित होता है कि धमकी देने में इस्तेमाल किए गए वर्चुअल नंबर सीधे आरोपी रोहित के मोबाइल से लिंक थे।
अपराधिक रहा है पुराना रिकॉर्ड
पुलिस के अनुसार, रोहित बर्रा कोई नौसिखिया नहीं है, बल्कि उसका पुराना अपराधिक इतिहास रहा है:
- पुराने मामले: उसके खिलाफ पहले से ही मारपीट और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर केस दर्ज हैं।
- सट्टे का कारोबार: शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि वह तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सट्टा खिलाने के लिए भी करता था।
अधिकारियों का क्या है कहना?
“हमने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तकनीकी एक्सपर्ट रोहित बर्रा को गिरफ्तार किया है। यह गैंग को ऐसे वर्चुअल नंबर तैयार करके देता था जिनमें विदेशी कोड दिखते थे, जिससे जांच को गुमराह किया जा सके। मामले की जांच अब भी जारी है।”
— राजेश त्रिपाठी, डीसीपी क्राइम ब्रांच, इंदौर




