Sign In
/
/
सतना में शर्मसार करती तस्वीर: थरपहाड़ में सड़क न होने से झोली में टांगकर ले जाना पड़ा मरीज, सिस्टम लाचार!

सतना में शर्मसार करती तस्वीर: थरपहाड़ में सड़क न होने से झोली में टांगकर ले जाना पड़ा मरीज, सिस्टम लाचार!

[inb_subtitle]

विज्ञापन

प्रांशु विश्वकर्मा

Published On: Sep 19, 2026, 3:51 PM IST

Updated On: Sep 19, 2026, 3:51 PM IST

🔗 Link Copied!
🔗 Link Copied!
सतना: डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े-बड़े दावों के बीच सतना जिले के मझगवां विकासखंड अंतर्गत चित्रकूट नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 13 में शामिल थरपहाड़ गांव से विकास की कड़वी हकीकत बयां करती तस्वीर सामने आई है। गांव में पक्की सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को एक गंभीर बीमार मरीज को कपड़े की झोली में बांधकर कंधे पर लादकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ा। यह दर्दनाक स्थिति केवल एक मरीज की मजबूरी नहीं, बल्कि थरपहाड़ के निवासियों की रोजमर्रा की नियति बन चुकी है, जहां इलाज से पहले अस्पताल पहुंचने का रास्ता ही मरीज के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन जाता है।
सतना का थरपहाड़ गांव, जहां सड़क की बदहाली बनी जान की दुश्‍मन, झोली में ले गए मरीज
थरपहाड़ में सड़क के अभाव में बीमार गोरे सिंह को कंधे पर उठाकर ले जाते लोग। सौजन्‍य ग्रामीण

अचानक बिगड़ी 28 वर्षीय गोरे सिंह की तबीयत

घटना शुक्रवार की बताई जा रही है, जहां गांव के निवासी गोरे सिंह (28 वर्ष) पिता बब्बू सिंह को अचानक तेज उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद हालत बिगड़ने लगी:
  1. वाहन आने का रास्ता नहीं: गांव तक एंबुलेंस या कोई भी चार पहिया वाहन पहुंचने का रास्ता न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी और कपड़े की मदद से झोली बनाई और मरीज को उस पर लादकर पैदल ही मुख्य मार्ग के लिए रवाना हुए।
  2. इलाज के बाद वापसी भी कठिन: मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद वाहन के जरिए मरीज को अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार और दवाएं दी गईं। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब मरीज को वापस घर लाया गया, तब भी मुख्य मार्ग से घर तक उसे कंधे पर उठाकर ही लाना पड़ा।

गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बारिश में काल बनता है रास्ता

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांव में जब भी कोई बुजुर्ग बीमार पड़ता है या गर्भवती महिला को प्रसव के लिए ले जाना होता है, तो सबसे पहले रास्ते का संकट सामने आ जाता है। बारिश के दिनों में यह कच्चा रास्ता पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने से कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।

नगर परिषद और प्रशासन के दावों पर भड़के ग्रामीण

ग्रामीणों ने नगर परिषद चित्रकूट और प्रशासनिक अधिकारियों की वादाखिलाफी पर कड़ा आक्रोश जताया है:
  • आश्वासन का खेल: ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी सड़क निर्माण को लेकर सवाल पूछा जाता है, तो जिम्मेदार कभी “भोपाल स्तर पर फाइल पेंडिंग होने” तो कभी “टेंडर प्रक्रिया जारी रहने” का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
  • धरातल पर सन्नाटा: कागजों पर सड़क निर्माण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर न तो कोई निर्माण एजेंसी पहुंची है और न ही काम शुरू हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें कागजी आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर पक्की सड़क चाहिए।

थरपहाड़ की जमीनी हकीकत: एक नजर में

विवरण स्थिति
प्रशासनिक क्षेत्र वार्ड 13, थरपहाड़ (चित्रकूट नगर परिषद, ब्लॉक मझगवां, सतना)
मुख्य समस्या पक्की सड़क का सर्वथा अभाव (केवल दलदली कच्चा मार्ग)
प्रभावित वर्ग गंभीर मरीज, वृद्धजन, छात्र एवं गर्भवती महिलाएं
प्रशासनिक रुख टेंडर व प्रशासनिक स्वीकृति का आश्वासन, धरातल पर शून्य कार्य

तकनीकी व प्रशासनिक हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता

चित्रकूट जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक नगर परिषद की सीमा में आने वाले थरपहाड़ गांव की यह स्थिति प्रशासनिक उपेक्षा को उजागर करती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे उग्र आंदोलन और प्रशासनिक घेराव के लिए बाध्य होंगे।
होम
MP ब्रेकिंग
Join करें
Join करें
मेन्यू