MP में पंचायत सचिवों के तबादले का ‘गेम चेंजर’ नियम: अब गृहग्राम और ससुराल में नहीं मिलेगी पोस्टिंग; 10 साल से जमे सचिवों का हटना तय, 15 जून तक लिस्ट होगी जारी

भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए एक बड़ा और कड़क प्रशासनिक कदम उठाया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने प्रदेश के 23 हजार से अधिक पंचायत सचिवों के स्थानांतरण (Transfer) को लेकर नई और बेहद सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर जारी इस नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपनी मनपसंद ‘रिश्तेदारी वाली’ पंचायतों में मलाई नहीं काट सकेगा। सरकार ने साफ किया है कि जिला कलेक्टरों की अनुशंसा और प्रभारी मंत्रियों की मंजूरी के बाद 15 जून 2026 तक सभी तबादला आदेश अनिवार्य रूप से जारी कर दिए जाएंगे।

भास्कर हाइलाइट्स: इन 3 स्थितियों में हर हाल में होगा सचिव का तबादला

नई गाइडलाइन के अनुसार, पंचायतों में स्थानीय गुटबाजी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए इन नियमों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है:

  1. ससुराल और गृहग्राम पर पूरी तरह बैन: अब कोई भी पंचायत सचिव अपने पैतृक गांव (गृहग्राम) या अपनी ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह पाएगा। यदि ऐसी कोई पोस्टिंग है, तो उसे तुरंत बदला जाएगा।
  2. रिश्तेदार सरपंच बने तो हटना तय: यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई करीबी रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित हो जाता है, तो उस सचिव का वहां से ट्रांसफर करना अनिवार्य (Compulsory) होगा।
  3. 10 साल का फॉर्मूला: जो पंचायत सचिव एक ही ग्राम पंचायत में पिछले 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कुंडली मारकर बैठे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा। यदि ऐसे सचिवों की संख्या ज्यादा है, तो जो सबसे लंबे समय से जमा है, उसका ट्रांसफर पहले होगा।

प्रतिबंध के दौरान भी इन दागी सचिवों पर गिरेगी ट्रांसफर की गाज

सामान्य दिनों में तबादलों पर रोक (बैन) रहने की अवधि के दौरान भी कुछ विशेष और गंभीर परिस्थितियों में पंचायत सचिवों का ट्रांसफर किया जा सकेगा:

  • जांच के दायरे में आए सचिव: जिन सचिवों के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, सरकारी धन का गबन या कोई गंभीर शिकायत लंबित है।
  • जांच एजेंसियों का शिकंजा: जिन सचिवों के खिलाफ लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (EOW) या अन्य बड़ी जांच एजेंसियों में मामला दर्ज है या विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) चल रही है, उन्हें तुरंत प्रभाव से हटाया जा सकेगा।

अंतरजिला ट्रांसफर में महिला सचिवों को बड़ी राहत और ‘एक’ शर्त

नियमों को सख्त करने के साथ-साथ सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अंतरजिला संविलियन (Inter-District Transfer) को स्वैच्छिक (इच्छा पर आधारित) रखा है, जिसमें महिलाओं को विशेष छूट दी गई है:

महिलाओं के लिए सुलभ नियम —

विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला ग्राम पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में ट्रांसफर के लिए सीधे जिला पंचायत सीईओ (CEO) को आवेदन दे सकेंगी। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति वाले सचिवों को भी यह सुविधा मिलेगी।

वरिष्ठता की शर्त:

यदि संबंधित जिले में पद खाली पाया जाता है, तो भोपाल संचालनालय से मंजूरी के बाद आदेश जारी होंगे। हालांकि, अंतरजिला ट्रांसफर लेने वाले सचिव की सीनियरिटी (वरिष्ठता) नए जिले की लिस्ट में सबसे नीचे (Last) कर दी जाएगी। साथ ही, यह विशेष सुविधा पूरे सेवाकाल में केवल एक बार ही मिलेगी।

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