The Khabrilal News India : मैहर और सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स व्यवस्था अब शोषण और लूट का अड्डा बनती नजर आ रही है। कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाईकर्मी,सिक्योरिटी गार्ड, कुक सहित दर्जनों कर्मचारी स्काई ब्लू सर्विस कंपनी के ठेकेदार के रहमोकरम पर काम करने को मजबूर हैं,जहां श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

The Khabrilal Desk : मैहर और सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स व्यवस्था अब शोषण और लूट का अड्डा बनती नजर आ रही है। कंप्यूटर ऑपरेटर,सफाईकर्मी,सिक्योरिटी गार्ड, कुक सहित दर्जनों कर्मचारी स्काई ब्लू सर्विस कंपनी के ठेकेदार के रहमोकरम पर काम करने को मजबूर हैं,जहां श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। श्रम आयुक्त कार्यालय मध्य प्रदेश ने न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत 1 अक्टूबर 2025 से परिवर्तनशील महंगाई भत्ते सहित नई वेतन दरें लागू करने के स्पष्ट आदेश जारी किए थे। नियमों के मुताबिक अकुशल श्रमिक को ₹12,150 प्रतिमाह अर्धकुशल को ₹13,146 प्रतिमाह कुशल को ₹14,869 प्रतिमाह उच्च कुशल को ₹16,494 प्रतिमाह लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार किसी को ₹5,200 तो किसी को ₹6,600 प्रतिमाह थमा रहा है यानी तय न्यूनतम वेतन का आधा भी नहीं।
ईपीएफ गायब, भविष्य पर डाका
मामला यहीं नहीं रुकता। कर्मचारियों के वेतन से कटने वाली ईपीएफ (EPFO) की राशि भी न तो जमा की जा रही है और न ही कोई रिकॉर्ड दिया जा रहा है। साफ है कि कर्मचारियों के वर्तमान के साथ-साथ भविष्य पर भी डाका डाला जा रहा है। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ने कुछ जिम्मेदार अधिकारियों से सांठगांठ कर रखी है। यही वजह है कि शिकायतें करने के बावजूद न निरीक्षण होता है,न नोटिस जारी होते हैं और न ही कोई कार्रवाई दिखाई देती है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्वास्थ्य विभाग के कंधों पर जनता की सेहत की जिम्मेदारी है,वही विभाग अपने ही कर्मचारियो के शोषण पर आंखें क्यों मूंदे बैठा है? आउटसोर्स कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए मांग की है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई बकाया वेतन और ईपीएफ की राशि नहीं मिली तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि श्रम विभाग और स्वास्थ्य विभाग इस खुली लूट पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं, और शोषित कर्मचारियों को उनका हक कब तक मिलता है।







