मैहर: मैहर जिले के रामनगर और अमरपाटन अंचल में कई दिनों से चहलकदमी कर जन-धन का नुकसान पहुंचा रहे जंगली हाथी ‘E-5’ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। विभाग द्वारा हाथी E-5 को सुरक्षित नियंत्रित करने और घने वन क्षेत्र में खदेड़ने अथवा रेस्क्यू करने के लिए ‘कुमकी ऑपरेशन’ (Kunki Operation) का आधिकारिक आगाज कर दिया गया है। इस विशेष रेस्क्यू मिशन को अंजाम देने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) से दो और उच्च प्रशिक्षित कुमकी (पालतू व अनुशासित) हाथियों को मैहर के प्रभावित वन क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है।

ऑपरेशन E-5: कैसे काम करेंगे कुमकी हाथी?
वन अधिकारियों के अनुसार, जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित कुमकी हाथियों की भूमिका बेहद निर्णायक होती है:
-
घेराबंदी व सुरक्षा: घने जंगलों के बीच जब वन विभाग के डॉक्टर और शूटर जंगली हाथी E-5 को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने का प्रयास करेंगे, तब कुमकी हाथी रेस्क्यू टीम को सुरक्षा घेरा प्रदान करेंगे।
-
दिशा नियंत्रण: कुमकी हाथी अपनी ताकत और प्रशिक्षण के दम पर उग्र हुए जंगली हाथी E-5 को आबादी वाले क्षेत्रों और गांवों की ओर जाने से रोकेंगे तथा उसे सही दिशा की ओर मोड़ने में मदद करेंगे।
-
सुरक्षित लोडिंग/शिफ्टिंग: ट्रेंकुलाइज होने की स्थिति में हाथी E-5 को सुरक्षित बांधने, संभालने या वाहन में लोड कराने में कुमकी हाथियों की मदद ली जाएगी।

ऑपरेशन E-5 का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | जानकारी |
| टारगेट जंगली हाथी | हाथी E-5 (रेडियो कॉलर आईडी युक्त) |
| मुख्य ऑपरेशन | कुमकी रेस्क्यू एवं ट्रेंकुलाइजेशन ऑपरेशन |
| सपोर्ट टीम | बांधवगढ़ नेशनल पार्क से आए प्रशिक्षित कुमकी हाथी व वेटरनरी एक्सपर्ट्स |
| प्रभावित क्षेत्र | पुरैना, रामनगर, अमरपाटन व बाणसागर तटीय क्षेत्र |
| उद्देश्य | जन-धन की सुरक्षा व हाथी E-5 का सुरक्षित रेस्क्यू |
वन अमला हाई अलर्ट पर
डीएफओ और वन मंडल की विशेष टीमें सैटेलाइट ट्रैकिंग और मैदानी अमले के माध्यम से हाथी E-5 की हर एक मिनट की लोकेशन पर नजर रख रही हैं। ऑपरेशन के दौरान आसपास की पंचायतों और गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को घरों के भीतर रहने और ऑपरेशन स्थल से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है।












