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90 साल की उम्र में भी वृद्धावस्था पेंशन के लिए भटक रहे Devsharan Prajapati

90 साल की उम्र में भी वृद्धावस्था पेंशन के लिए भटक रहे Devsharan Prajapati

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महफूज खान

Published On: Nov 4, 2026, 9:14 AM IST

Updated On: Nov 4, 2026, 9:14 AM IST

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सिरमौर: 90 वर्षीय बुजुर्ग Devsharan Prajapati अपनी वृद्धावस्था पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई बार आवेदन देने और पंचायत से लेकर तहसील तक गुहार लगाने के बावजूद उन्हें आज तक पेंशन की एक भी किस्त नहीं मिली है।

विडंबना यह है कि बुजुर्ग स्वयं इस उम्र में आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी पत्नी लंबे समय से लकवा (पैरालिसिस) की बीमारी से ग्रसित हैं। पत्नी चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं और बिस्तर पर ही रहने को मजबूर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उनके समुचित इलाज के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं। ऐसे में 90 वर्षीय देवशरण प्रजापति अपनी पत्नी की देखभाल के साथ-साथ आर्थिक सहायता के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

पेंशन के लिए कई बार किया आवेदन, फिर भी खाली है खाता

Devsharan Prajapati का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर वृद्धावस्था पेंशन उनके लिए सबसे बड़ा सहारा हो सकती है। इसी उम्मीद में उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाए। पेंशन के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया, लेकिन इसके बावजूद आज तक उनके बैंक खाते में पेंशन की एक भी किस्त नहीं पहुंची।

बुजुर्ग का कहना है कि लगातार प्रयास करने के बाद भी उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई कि आखिर उनकी पेंशन क्यों स्वीकृत नहीं हो रही है। सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उम्र अधिक होने और शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण अब उनके लिए सरकारी दफ्तरों तक पहुंचना भी मुश्किल होता जा रहा है।

90 वर्ष की उम्र में जब किसी बुजुर्ग को आराम और सहारे की जरूरत होती है, उस समय देवशरण प्रजापति को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

लकवाग्रस्त पत्नी बिस्तर पर, इलाज के लिए नहीं हैं पैसे

देवशरण प्रजापति की परेशानी केवल वृद्धावस्था पेंशन तक सीमित नहीं है। उनकी पत्नी लंबे समय से लकवा की बीमारी से पीड़ित हैं। बीमारी के कारण उनके पैर काम नहीं कर रहे हैं और वह अपने दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। उन्हें नियमित उपचार और देखभाल की आवश्यकता है।

लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते पत्नी का बेहतर इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। एक तरफ 90 वर्षीय पति स्वयं बुजुर्ग हैं, वहीं दूसरी तरफ बीमार पत्नी की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है।

परिवार की स्थिति ऐसी है कि इलाज के लिए जरूरी संसाधन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में यदि प्रशासन की ओर से समय रहते सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई तो बुजुर्ग परिवार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

विधायक से लेकर जनदर्शन तक लगाई गुहार, नहीं मिला जवाब

अपनी और पत्नी की परेशानी को लेकर देवशरण प्रजापति ने स्थानीय विधायक से भी मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी वृद्धावस्था पेंशन शुरू कराने और लकवाग्रस्त पत्नी के उपचार के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। बुजुर्ग के अनुसार, वह अपनी समस्या लेकर जनदर्शन में भी पहुंचे थे, ताकि उनकी फरियाद जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच सके।

इसके बावजूद उनका कहना है कि अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या ठोस मदद नहीं मिली है। कई स्तरों पर अपनी समस्या रखने के बाद भी निराशा हाथ लगने से बुजुर्ग और उनका परिवार परेशान है।

Devsharan Prajapati ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “अब इस उम्र में कहां जाएं? पत्नी बीमार है, मैं 90 साल का हूं। कोई सहारा नहीं है। पत्नी का इलाज भी नहीं करा पा रहा हूं और मेरी पेंशन भी नहीं मिल रही है।”

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग

ग्राम पंचायत हिनौती के ग्रामीणों का कहना है कि देवशरण प्रजापति अत्यंत गरीब परिवार से हैं। उनकी उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन को मानवीय आधार पर तत्काल मदद करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत गंगेव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से मांग की है कि बुजुर्ग की वृद्धावस्था पेंशन से संबंधित आवेदन और पात्रता की जांच कर जल्द से जल्द पेंशन स्वीकृत कराई जाए। साथ ही उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेष चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर महिला की जांच करे और आवश्यकता के अनुसार उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

आयुष्मान योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि देवशरण प्रजापति की पत्नी को आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार की सुविधा दिलाने की दिशा में पहल की जाए। इसके लिए पहले उनकी पात्रता और योजना के अंतर्गत उपलब्ध उपचार सुविधाओं की जांच कराई जाए, ताकि बीमारी के अनुसार उचित चिकित्सा व्यवस्था हो सके।

यदि आवश्यक हो तो महिला को जिला अस्पताल या किसी अन्य उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में रेफर कर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्ग दंपती को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल व्यावहारिक सहायता की जरूरत है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

देवशरण प्रजापति का मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जरूरतमंदों तक उनका लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि 90 वर्ष का बुजुर्ग पेंशन के लिए बार-बार आवेदन करने के बावजूद लाभ से वंचित है, तो संबंधित विभागों को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए।

प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि आवेदन में कोई तकनीकी कमी है, दस्तावेजों की समस्या है या फिर किसी अन्य कारण से पेंशन स्वीकृत नहीं हो पा रही है। यदि बुजुर्ग पात्र हैं तो बिना अनावश्यक देरी के उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाना चाहिए।

वहीं, उनकी पत्नी की बीमारी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत गंगेव के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार की मदद करेंगे।

पीड़ित परिवार को अब प्रशासन से उम्मीद

90 वर्षीय Devsharan Prajapati के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन कब शुरू होगी और उनकी पत्नी को बेहतर इलाज कब मिल पाएगा। उम्र के अंतिम पड़ाव पर उन्हें सरकारी योजनाओं का सहारा मिलना चाहिए, लेकिन फिलहाल वह अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को प्राथमिकता देते हुए बुजुर्ग की पेंशन स्वीकृति, पत्नी के उपचार और परिवार को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।

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