सतना/मैहर : विंध्य अंचल के दो सबसे प्रमुख आस्था केंद्रों— धर्मनगरी चित्रकूट और मां शारदा की पावन नगरी मैहर— को जोड़कर एक एकीकृत पर्यटन सर्किट (Tourism Circuit) में विकसित करने की आवश्यकता अब और गहरा गई है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सतना और मैहर जिले में धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, मुख्य चुनौती चित्रकूट आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को मैहर, मुकुंदपुर और पन्नीखोह जैसे अन्य प्रमुख स्थलों तक ले जाकर उन्हें क्षेत्र में रोकने की है।

चित्रकूट की रामायण परंपरा से लेकर मैहर के संगीत घराने तक समृद्ध धरोहर
क्षेत्र का पर्यटन सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार कला, इतिहास और प्रकृति तक फैला हुआ है। एक तरफ जहां चित्रकूट में भगवान श्रीराम की रामायणकालीन परंपरा, मंदाकिनी नदी के घाट, कामदगिरि पर्वत, गुप्त गोदावरी, भरत मिलाप और जानकी कुंड जैसे आध्यात्मिक केंद्र हैं; वहीं दूसरी ओर मैहर में मां शारदा मंदिर, आल्हा-ऊदल की अमर लोकगाथा, महान संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खां का ‘मैहर संगीत घराना’, गोला मठ, बड़ा अखाड़ा, ओइला मंदिर और बाबा तालाब जैसे ऐतिहासिक स्थल समृद्ध विरासत की गवाही देते हैं।
पन्नीखोह जलप्रपात और मुकुंदपुर टाइगर सफारी जोड़ते हैं प्राकृतिक आयाम
धार्मिक स्थलों के अलावा यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भी भरपूर है। उचेहरा क्षेत्र का पन्नीखोह जलप्रपात और मुकुंदपुर की विश्व प्रसिद्ध महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी (सफेद बाघ सफारी) पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि इन सभी स्थलों को एक सूत्र में पिरोकर एक ‘स्टोरीटेलिंग सर्किट’ के रूप में प्रचारित किया जाए, तो पर्यटक सतना और मैहर में कई दिनों तक रुक सकते हैं।
लाखों की भीड़ को अन्य पर्यटन स्थलों तक डायवर्ट करना बड़ी चुनौती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चित्रकूट में सामान्य अमावस्या पर्वों पर 2 से 2.5 लाख, दीपोत्सव (दीपावली) पर 20 से 22 लाख और नवरात्रि में 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। वहीं मैहर में त्रिकूट पर्वत पर 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित 1001 सीढ़ियों वाले मां शारदा मंदिर में भी लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार की ‘प्रसाद योजना’ और ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत चित्रकूट को प्रमुख गंतव्य के रूप में चुना गया है तथा मैहर में जनसुविधाओं के विस्तार के प्रस्ताव भेजे गए हैं। ठहराव के लिए मैहर हेरिटेज पैलेस और एमपीटी सुरबहार जैसी प्रीमियम सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन और पर्यटन विभाग के सामने इस भारी भीड़ को सुव्यवस्थित रूट मैप और पैकेज के जरिए पूरे विंध्य सर्किट से जोड़ने की है।











