मऊगंज में पहली ही बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल, जलभराव के कारण डूबने से दो बछड़ों की दर्दनाक मौत: सरपंच प्रतिनिधि बोले- ‘बजट नहीं है, ४ महीने बाद देखेंगे’; पीड़ित ने खुद सड़क खोदकर निकाला पानी


मऊगंज/हनुमना: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित मऊगंज (Mauganj) जिले से मानसून की पहली ही बारिश में ग्रामीण विकास और जल निकासी की दावों की धज्जियां उड़ाने वाली खबर सामने आई है। जनपद पंचायत हनुमना के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरौही में जल निकासी का माकूल इंतजाम न होने के कारण एक घर में बाढ़ जैसे हालात बन गए। पानी का भराव इतना तेजी से हुआ कि घर के भीतर बंधे दो मासूम बछड़ों की पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस प्रशासनिक विफलता और लापरवाही के बाद पूरे अंचल के ग्रामीणों में भारी जनआक्रोश देखा जा रहा है।


पीड़ित रामलोचन पाण्डेय के घर में घुसा पानी; बेबस होकर खुद तोड़ी मुख्य सड़क

बरौही गांव में घटित इस जमीनी घटनाक्रम की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • तड़प-तड़प कर मरे बेजुबान: स्थानीय विलेखों के अनुसार, बरौही गांव के निवासी रामलोचन पाण्डेय के आवासीय परिसर में बारिश का पानी अचानक जमा होने लगा। निकासी का कोई विधिक मार्ग न होने के कारण पूरा घर जलमग्न हो गया। जब तक पानी निकालने का प्रयास किया जाता, तब तक घर के भीतर बंधे दो बछड़ों ने दम तोड़ दिया। इस हादसे से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है।
  • प्रशासनिक बेरुखी, खुद संभाला मोर्चा: घटना के दौरान जब पीड़ित परिवार को पंचायत या प्रशासनिक अमले से कोई त्वरित मदद नहीं मिली, तो रामलोचन पाण्डेय ने मजबूरी में खुद ही फावड़ा उठाकर मुख्य पक्की सड़क को खोद दिया। सड़क के बीचो-बीच गड्ढा कर पानी की निकासी तो कर दी गई, लेकिन अब इस विलेख के कारण गांव का मुख्य आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।

सरपंच प्रतिनिधि का गैर-जिम्मेदाराना बयान; २ साल के तालाब फंड पर उठे विधिक सवाल

पंचायत में चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है:

  1. चार महीने बाद देखेंगे व्यवस्था: ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने मानसून शुरू होने से पहले ही सरपंच प्रतिनिधि से सड़क के नीचे ह्यूम पाइप (पाइपलाइन) डालकर स्थायी निकासी बनाने का विधिक आग्रह किया था। लेकिन प्रतिनिधि ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि पंचायत में अभी कोई ‘बजट’ नहीं है और चार महीने (बारिश बीतने) के बाद ही कुछ देखा जाएगा।
  2. तालाब निर्माण के फंड में हेराफेरी का आरोप: इस हादसे के बाद ग्रामीणों ने पंचायत विंग द्वारा पिछले 2 वर्षों में तालाब निर्माण और जीर्णोद्धार के नाम पर निकाली गई भारी-भरकम राशि के विलेखों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों पर तो लाखों खर्च हो गए, लेकिन धरातल पर पानी रोकने या निकालने की कोई कड़ियाँ मौजूद नहीं हैं।

कलेक्ट्रेट विंग से उच्च स्तरीय जांच और मुआवजे की विधिक मांग

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कार्रवाई की कड़ियाँ —
“बरौही गांव के प्रबुद्ध नागरिकों ने मऊगंज जिला कलेक्टर और जनपद सीईओ (CEO) से मांग की है कि इस पूरी लापरवाही की विधिक जांच कराई जाए.
ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि गांव के प्राकृतिक नालों से तत्काल अवैध अतिक्रमण हटाया जाए, बेजुबान पशुओं की मौत पर पीड़ित रामलोचन पाण्डेय को पशुहानि मुआवजा नियमावली के तहत वित्तीय सहायता दी जाए और पिछले दो सालों में हुए निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कर दोषी विंग पर विधिक कार्रवाई की जाए।”


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