रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले का Sirmaur अनुभाग लंबे समय से अवैध नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। क्षेत्र में गांजा, अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। लेकिन अब सिरमौर अनुभाग में पुलिस की सक्रियता और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सिरमौर के SDOP रूपेंद्र धुर्वे के नेतृत्व में बैकुंठपुर, सेमरिया और सिरमौर थाना क्षेत्रों में पुलिस ने निगरानी, गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई तेज की है।
बताया जा रहा है कि SDOP रूपेंद्र धुर्वे के पदभार संभालने के बाद पुलिसिंग को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। थानों में फरियादियों की शिकायतें सुनने से लेकर रात्रि गश्त, वाहन चेकिंग और नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी सूचनाओं पर कार्रवाई तक कई स्तरों पर पुलिस की सक्रियता बढ़ी है। खासतौर पर नशे के कारोबार को रोकने के लिए पुलिस ने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने और संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी रखने की रणनीति अपनाई है।
मैदान में उतरकर कार्रवाई की निगरानी कर रहे SDOP
सिरमौर अनुभाग में SDOP रूपेंद्र धुर्वे की कार्यशैली की चर्चा का एक प्रमुख कारण उनका स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर पुलिस गतिविधियों की निगरानी करना बताया जा रहा है। वे केवल कार्यालय से निर्देश देने तक सीमित रहने के बजाय रात्रि गश्त, वाहन चेकिंग और संदिग्ध गतिविधियों की जांच के दौरान पुलिस टीमों के साथ मौजूद रहते हैं।
बस स्टैंड, बाजार, प्रमुख चौराहों और सुनसान रास्तों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। रात के समय पुलिस गश्त को प्रभावी बनाने और संदिग्ध वाहनों की जांच करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोग उनकी सक्रिय कार्यशैली को ‘सिरमौर का सिंघम’ कहकर संबोधित कर रहे हैं। हालांकि पुलिसिंग की वास्तविक सफलता का आकलन लगातार दर्ज होने वाली शिकायतों, अपराधों पर नियंत्रण और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ होने वाली ठोस कार्रवाई से ही किया जाएगा।
पदभार संभालते ही तीनों थाना क्षेत्रों को दिए सख्त निर्देश
SDOP का पदभार संभालने के बाद रूपेंद्र धुर्वे ने सिरमौर अनुभाग के अंतर्गत आने वाले सिरमौर, बैकुंठपुर और सेमरिया थाना प्रभारियों तथा चौकी प्रभारियों के साथ बैठक कर कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की।
बैठक में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने, अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने और आम लोगों की शिकायतों का समय पर निराकरण करने पर जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि नशे के कारोबार से जुड़ी किसी भी सूचना को हल्के में नहीं लिया जाए। सूचना मिलने पर तत्काल जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
SDOP की प्राथमिकता में यह भी शामिल बताया जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति को उसके प्रभाव, पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर कानून से ऊपर नहीं माना जाए। पुलिस को बिना किसी दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैकुंठपुर थाना: नशे के अवैध कारोबार पर पुलिस की नजर
बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में गांजा और अवैध शराब की बिक्री को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीण इलाकों और कस्बाई क्षेत्रों में नशे के कारोबार की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।
पुलिस की रणनीति के तहत संदिग्ध स्थानों, खेतों, बाड़ियों और ऐसे मकानों पर नजर रखी जा रही है, जहां अवैध रूप से नशीले पदार्थ छिपाकर रखे जाने की आशंका हो सकती है। नशे की छोटी-छोटी खेप बेचने वालों से लेकर सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए सूचनाओं का सत्यापन किया जा रहा है।
बस स्टैंड और बाजार के आसपास भी पुलिस की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। अवैध शराब, गांजा और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस का प्रयास है कि नशे का कारोबार केवल किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे सप्लाई नेटवर्क और अन्य संबंधित लोगों की भी पहचान की जा सके।
सेमरिया थाना छोटे विक्रेताओं से लेकर सप्लाई नेटवर्क तक जांच
सेमरिया थाना क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस द्वारा अलग रणनीति अपनाने की बात सामने आ रही है। यहां संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही नशे की बिक्री से जुड़े लोगों के संपर्कों और सप्लाई के स्रोतों की जानकारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।
बस स्टैंड, हाट-बाजार और स्कूल-कॉलेज के आसपास पुलिस की निगरानी बढ़ाने की जरूरत को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों की चपेट में आने से बचाना और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोकना है।
इसके अलावा अवैध शराब की बिक्री के संभावित ठिकानों पर भी पुलिस की नजर है। स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध स्थानों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की कोशिश है कि नशे के कारोबार में शामिल छोटे विक्रेताओं के साथ-साथ उनके पीछे सक्रिय सप्लाई नेटवर्क की भी पड़ताल हो, ताकि अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचा जा सके।
सिरमौर थाना मुख्यालय क्षेत्र में चेकिंग और गश्त पर जोर
सिरमौर थाना क्षेत्र में भी पुलिस की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कस्बे के बस स्टैंड, मुख्य बाजार, अस्पताल तिराहा और बायपास रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर वाहन चेकिंग और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
शाम और रात के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ ही दोपहिया वाहनों की जांच, संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ और आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का जोर है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बढ़ावा न मिले। नशीले पदार्थों की बिक्री और तस्करी की सूचना मिलने पर संबंधित टीम को तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यालय क्षेत्र में नियमित चेकिंग से पुलिस की मौजूदगी दिखाई दे रही है, जिससे आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने और असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है।
SDOP रूपेंद्र धुर्वे की कार्यशैली में ये पांच बातें अहम
1. जनसुनवाई को प्राथमिकता
पुलिस व्यवस्था में आम नागरिकों की शिकायतों को सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। SDOP कार्यालय में फरियादियों की समस्याएं सुनने और संबंधित थाना प्रभारियों को आवश्यक निर्देश देने पर जोर दिया जा रहा है। नशे के कारोबार से संबंधित सूचना देने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
2. शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई
किसी भी फरियादी को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े, इसके लिए शिकायतों पर समय से कार्रवाई और नियमानुसार FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का प्रयास है कि पीड़ितों को न्याय के लिए बार-बार थानों के चक्कर न लगाने पड़ें।
3. रात्रि गश्त और औचक निरीक्षण
रात के समय अपराध और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए गश्त को प्रभावी बनाना जरूरी है। SDOP द्वारा समय-समय पर पुलिस की कार्यप्रणाली और गश्ती व्यवस्था का निरीक्षण किए जाने की बात कही जा रही है। इससे थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
4. मुखबिर तंत्र को मजबूत करना
नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर विश्वसनीय सूचना तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गांवों और कस्बों में लोगों से संपर्क बनाकर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।
5. युवाओं को नशे से बचाने की पहल
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल गिरफ्तारी और छापेमारी से पूरी नहीं हो सकती। इसके लिए युवाओं और अभिभावकों को जागरूक करना भी जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर नशे के दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
आम जनता को पुलिस से बढ़ी उम्मीदें
सिरमौर, बैकुंठपुर और सेमरिया क्षेत्र में पुलिस की बढ़ती सक्रियता से स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि पुलिस इसी तरह नियमित गश्त, चेकिंग और संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई जारी रखती है तो नशे के कारोबार में शामिल लोगों पर दबाव बनेगा। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी भी जरूरी होगी।
स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि पुलिस शिकायतों को गंभीरता से सुने और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करे। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान न किया जाए और प्रत्येक कार्रवाई कानून के दायरे में हो।
नशा कारोबारियों के नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत
नशे के अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए केवल स्थानीय स्तर पर बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे सक्रिय सप्लायर, परिवहन के साधन, आर्थिक लेन-देन और अन्य सहयोगियों की पहचान करना भी आवश्यक है।
सिरमौर अनुभाग के तीनों थाना क्षेत्रों में समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई की जाए तो अवैध कारोबार के नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए पुलिस को पुराने मामलों का विश्लेषण, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर योजनाबद्ध कार्रवाई करनी होगी।
इसके अलावा नशे की लत से जूझ रहे युवाओं को अपराधी मानकर छोड़ देने के बजाय उनके पुनर्वास पर भी ध्यान देना होगा। नशा मुक्ति केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से ऐसे युवाओं को उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जा सकता है।
आगे क्या होगी पुलिस की रणनीति?
सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में नशे के खिलाफ अभियान को और व्यापक बनाने की तैयारी की चर्चा है। इसके तहत सिरमौर, बैकुंठपुर और सेमरिया थानों की संयुक्त टीम बनाकर संदिग्ध ठिकानों की जांच और बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
यदि तीनों थाना क्षेत्रों की पुलिस आपसी समन्वय से काम करती है तो एक थाना क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में नशे की सप्लाई करने वाले नेटवर्क पर भी नजर रखना आसान होगा। इसके साथ ही रात्रि गश्त, वाहन चेकिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच बढ़ाने की रणनीति को भी लगातार जारी रखने की आवश्यकता है।
हालांकि किसी भी अभियान की सफलता का वास्तविक आकलन कार्रवाई के आंकड़ों, दर्ज मामलों, जब्त नशीले पदार्थों और नशे की बिक्री में आई कमी के आधार पर किया जाना चाहिए।
पुलिसिंग में बदलाव की कसौटी होगी लगातार कार्रवाई
कुल मिलाकर सिरमौर अनुभाग में SDOP रूपेंद्र धुर्वे के नेतृत्व में पुलिस की सक्रियता और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चर्चा में है। बैकुंठपुर, सेमरिया और सिरमौर तीनों थाना क्षेत्रों में गश्त, चेकिंग, जनसुनवाई और सूचना तंत्र को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती इस सक्रियता को लगातार बनाए रखने की है। नशे के कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ जनसहयोग, युवाओं में जागरूकता और नशे की लत से प्रभावित लोगों का पुनर्वास भी जरूरी है।
यदि पुलिस, प्रशासन और समाज मिलकर इस दिशा में काम करते हैं तो सिरमौर अनुभाग को नशे के अवैध कारोबार से मुक्त बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।











